{"_id":"6179886961c67248c678d3d1","slug":"ahoi-ashtami-festival-today-the-importance-of-fasting-will-increase-manifold-in-sadhya-yoga-and-guru-pushya-nakshatra-wishes-will-be-fulfilled-kasganj-news-agr512934963","type":"story","status":"publish","title_hn":"अहोई अष्टमी पर्व आज : साध्य योग और गुरु पुष्य नक्षत्र में बढ़ेगा व्रत का कई गुना महत्व, मनोकामनाएं होंगी पूर्ण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अहोई अष्टमी पर्व आज : साध्य योग और गुरु पुष्य नक्षत्र में बढ़ेगा व्रत का कई गुना महत्व, मनोकामनाएं होंगी पूर्ण
विज्ञापन
कासगंज। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर अहोई अष्टमी पर्व मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतानों की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। जिले में बृहस्पतिवार को अहोई अष्टमी पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों ने विधि-विधानपूर्वक शुभ मुहूर्त में पूजा अर्चना करने की विधि बताई है। कहा है कि मां पार्वती की पूजा संतान को दीर्घायु देती है।
अहोई अष्टमी को माताएं निर्जला व्रत रखकर प्रदोष काल में अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं। इस दौरान अहोई अष्टमी व्रत कथा का पाठ भी होता है। मान्यता है कि व्रत रखने और व्रत कथा का श्रवण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस साल अष्टमी पर साध्य योग और गुरु पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। जो व्रत को कई गुना फलदायी बनाएगा। इस दिन अहोई व्रत का पारायण तारों का दर्शन करने के बाद किया जाता है। संध्या होने पर अहोई अष्टमी माता की पूजा कर तारों का दर्शन कर पुन: जल का अर्ध्य देती हैं। तभी व्रत का महत्व पूरा होता है।
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी बृहस्पतिवार दोपहर 12:49 बजे से लगेगी जो रात 9:40 मिनट पर समाप्त होगी। सोने पर सुहागा यह भी है कि इस दिन चंद्रमा अपनी ही राशि कर्क में रहेंगे। इससे व्रतियों को माता अहोई की पूर्ण कृपा प्राप्त होगी।
विज्ञापन
अहोई अष्टमी पर चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा और स्वगृही(अपने घर में) होगा। यह विधान बहुत ही कम बनता है। इस बार योग और नक्षत्रों का संयोग व्रत को कई गुना फलदायी बनाएगा। व्रतियों को इस दिन विधि-विधानपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इससे उनकी मनोकामनाओं पूर्ण होंगी। - पं. रामबल्लभ शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
विज्ञापन
अहोई अष्टमी को माताएं निर्जला व्रत रखकर प्रदोष काल में अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं। इस दौरान अहोई अष्टमी व्रत कथा का पाठ भी होता है। मान्यता है कि व्रत रखने और व्रत कथा का श्रवण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इस साल अष्टमी पर साध्य योग और गुरु पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। जो व्रत को कई गुना फलदायी बनाएगा। इस दिन अहोई व्रत का पारायण तारों का दर्शन करने के बाद किया जाता है। संध्या होने पर अहोई अष्टमी माता की पूजा कर तारों का दर्शन कर पुन: जल का अर्ध्य देती हैं। तभी व्रत का महत्व पूरा होता है।
विज्ञापन
यह रहेगा शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी बृहस्पतिवार दोपहर 12:49 बजे से लगेगी जो रात 9:40 मिनट पर समाप्त होगी। सोने पर सुहागा यह भी है कि इस दिन चंद्रमा अपनी ही राशि कर्क में रहेंगे। इससे व्रतियों को माता अहोई की पूर्ण कृपा प्राप्त होगी।
विज्ञापन
अहोई अष्टमी पर चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा और स्वगृही(अपने घर में) होगा। यह विधान बहुत ही कम बनता है। इस बार योग और नक्षत्रों का संयोग व्रत को कई गुना फलदायी बनाएगा। व्रतियों को इस दिन विधि-विधानपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इससे उनकी मनोकामनाओं पूर्ण होंगी। - पं. रामबल्लभ शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन