एसएन मेडिकल कॉलेज अग्निकांड: कर्मचारियों की बीड़ी से खतरे में पड़ गई थी 315 मरीजों की जान, जांच में खुला राज
एसएन मेडिकल कॉलेज की आठ मंजिला इमारत के बेसमेंट में लगी आग का राज खुल गया है। कर्मचारियों की बीड़ी से कचरे में आग सुलगी थी। इसकी जांच कर रिपोर्ट सौंप दी गई है। जांच कमेटी ने 10 बिंदुओं पर सुधार की संस्तुति की है।
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प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि नौ सदस्यीय जांच कमेटी की निगरानी में बिजली सेल की टीम के साथ आठ मंजिला इमारत का निरीक्षण किया गया। कहीं भी वायर जलने या फिर शॉर्ट सर्किट नहीं मिला। यहां कर्मचारी, नर्सिंग स्टाफ समेत 15 से अधिक लोगों के बयान लिए।
इसमें पाया कि तीसरी मंजिल पर अग्निशमन विभाग की ओर से बताए मानकों पर काम चल रहा है। इनमें से कुछ कर्मचारी धूम्रपान करते थे। उन्होंने ही जलती बीड़ी डक्ट में फेंक दी। इससे कचरा सुलगता रहा। कर्मचारियों को सख्त हिदायत देने के साथ कमेटी की सिफारिशों पर कार्य शुरू कर दिया है।
इमारत से शिफ्ट करने पड़े थे 315 मरीज
15 मार्च को बेसमेंट में आग सुलगने पर पूरी इमारत में धुआं भर गया था। इस पर हड्डी रोग, सर्जरी विभाग, ईएनटी विभाग और बाल रोग विभाग में भर्ती 315 मरीजों को एमसीएच इमारत में शिफ्ट करना पड़ा था। मरीजों की जान सांसत में आ गई थी।
ये की संस्तुति
1- इमारत के सभी डक्ट, बेसमेंट में कचरा साफ किया जाए।
2- इमरजेंसी लाइट लगाई जाएं, जिसमें आठ घंटे का बैकअप हो।
3- हर ब्लॉक और वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
4- नियंत्रण कक्ष बनाया जाए, जिसमें महत्वपूर्ण नंबर दर्ज हों।
5- सभी मंजिल पर स्पीकर लगें, जिससे आपात स्थिति में सूचना दी जा सके।
6- हर मंजिल पर सूचना पट्टिका लगाई जाएं, जिससे मरीजों को जानकारी हो।
7- रैंप खाली और साफ रखी जाएं, जिससे आपात स्थिति में निकला जा सके।
8- स्मोक डिटेक्टर लगाए जाएं, अग्निशमन विभाग के मानक पूरे किए जाएं।
9- इमारत के अंदर धूम्रपान संबंधी सामग्री पर पाबंदी लागू की जाए।
10- कार्य का विभाजन हो और उनकी जवाबदेही तय हो, विभागाध्यक्ष भी नजर रखें।
(जैसा कि जांच समिति के सदस्य डॉ. बृजेश शर्मा ने बताया)