फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Agra Sees Major Improvement in Groundwater Level After Heavy Rainfall

UP: आगरा में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का असर, एक साल में 1.08 मीटर सुधरा भूजल स्तर; ये है ताजा रिपोर्ट

Mon, 11 May 2026 11:57 AM IST
Dhirendra Singh देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 11 May 2026 11:57 AM IST
सार

आगरा में रिकॉर्ड बारिश और रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्रयासों से एक साल में भूजल स्तर में 1.08 मीटर का सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि शहर अब भी अति-दोहित श्रेणी में है और भूजल संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

विज्ञापन
Agra Sees Major Improvement in Groundwater Level After Heavy Rainfall
ताजा रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 बारिश ने शहर की प्यासी जमीन की सेहत में कुछ हद तक सुधार किया है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग से डार्क जोन में शामिल नगर क्षेत्र के भूजल स्तर में एक साल के भीतर एक मीटर से अधिक का उछाल आया है। भूजल संकट ग्रस्त शहर में ये आंकड़े संजीवनी की तरह हैं, जो भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत देते हैं।
विज्ञापन


नगर क्षेत्र में 100 वार्ड हैं। करीब 5000 गली, मोहल्ले व कॉलोनियां हैं, जिनमें 20 लाख से अधिक आबादी रहती है। भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार नगर क्षेत्र में साल 2024 के मानसून के बाद भूजल स्तर जहां 22.20 एमबीजीएल (मीटर बिलो ग्राउंड लेवल यानी जमीन से नीचे) रिकॉर्ड किया गया था, वहीं 2025 में यह सुधरकर 21.12 एमबीजीएल पर आ गया है। महज एक साल में 1.08 मीटर की यह वृद्धि जल संरक्षण के प्रयासों की बड़ी जीत है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, शहरी इलाकों में वाटर हार्वेस्टिंग का प्रभावी क्रियान्वयन ही गिरते जलस्तर को थामने का एकमात्र विकल्प है।
विज्ञापन

39 विभागों के प्रयास और रिकॉर्ड बारिश का कमाल
शहर में विशाल आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के कारण संसाधनों पर जबरदस्त दबाव है। इस चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने प्रोजेक्ट मेघपुष्प-2 के तहत 39 विभागों को जोड़कर वर्षा जल संचयन की व्यापक रणनीति तैयार की। शहर में लगाई गईं रेन वाटर हार्वेस्टिंग इकाइयों और साल 2024 के मानसून में हुई 869.6 मिमी की रिकॉर्ड बारिश (सामान्य से 41.47% अधिक) ने मिलकर जलभृतों (एक्विफर्स) को रिचार्ज करने में मदद की।
 

अति-दोहन की चुनौती अब भी बरकरार
भूजल स्तर में सुधार के बावजूद खतरा टला नहीं है। आगरा शहर अब भी भूजल दोहन के मामले में अति-दोहित श्रेणी में है। यहां भूजल निकालने की दर 120.22% है, जिसका अर्थ है कि हम संचयन की तुलना में कहीं अधिक पानी निकाल रहे हैं। जिले की भूगर्भीय संरचना में बालू की परतें काफी पतली हैं, जिससे जमीन के नीचे पानी रिसने की प्राकृतिक प्रक्रिया बेहद धीमी है।
 
विज्ञापन

मेघपुष्प में बनाईं 8,624 जल संचय संरचनाएं
मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट मेघपुष्प-2 के तहत जिले को डार्क जोन से निकालने के लिए कैच द रेन फ्रेमवर्क के तहत अब तक कुल 13,636 जल संचयन कार्यों को मंजूरी दी गई है। इनमें से 8,624 संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनमें शहरी हार्वेस्टिंग इकाइयां और सोक पिट प्रमुख हैं। इसी का परिणाम है कि जिले के 16 में से 9 क्षेत्रों में जलस्तर सुधरा है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed