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UP: बाग ए जफर खां को बना डालाऔरंगजेब की हवेली, इतिहास के साथ छेड़छाड़ पर उठे सवाल
Thu, 16 Oct 2025 10:03 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 16 Oct 2025 10:03 AM IST
सार
पुरातत्व विभाग ने 400 साल पुरानी धरोहर की पहचान ही बदल दी। वाटरवर्क्स चौराहे पर मौजूद रोजा-ए-जफर खां यानी जफर खां के मकबरे को औरंगजेब की हवेली का नाम दे दिया।
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400 साल पुरानी धरोहर का बदल दिया नाम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के वाटरवर्क्स चौराहे पर यमुना किनारे मौजूद बाग ए जफर खां को औरंगजेब की हवेली के नाम से संरक्षित किए जाने के मामले में पर्यटन और पुरातत्व से जुड़े लोगों ने जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को पत्र भेजकर पर्यटन संस्थाओं ने अधिकारियों की जांच की मांग उठाई है।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश चौहान ने कहा कि यह गंभीर मामला है। हमने मुख्यमंत्री और संस्कृति मंत्री से जांच की मांग की है। एक तरफ सरकार औरंगजेब की जगह छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े इतिहास को संजो रही है, दूसरी तरफ अधिकारी किसी भी स्मारक और इमारत को बिना तथ्य जाने औरंगजेब की हवेली के नाम से संरक्षित कर रहे हैं। आगरा टूरिस्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन अध्यक्ष संदीप अरोड़ा ने बताया कि ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ क्यों और किसके दबाव में की गई, यह सामने आना चाहिए।
श्रीकृष्ण लीला समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि 1938 से लगातार यहां श्रीकृष्ण लीला का मंचन होता आया है। अचानक राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे औरंगजेब की हवेली बता दिया। इसके ऐतिहासिक दस्तावेज कहां हैं। मैंने संस्कृति मंत्री और प्रमुख सचिव से जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आए।
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हमारा आगरा के अध्यक्ष ओम शर्मा ने कहा कि राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारी विरासत बचाने की जगह विनाश करने पर तुले हैं। सिकंदरा क्षेत्र में लोदी काल की कई धरोहरें हाल में ही ध्वस्त हो गई। इन्हें बचाने की जगह मनमाने तरीके से इतिहास को बदलने में लगे हैँ। इस मामले में मुख्यमंत्री खुद हस्तक्षेप करें और जांच कराएं।
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होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश चौहान ने कहा कि यह गंभीर मामला है। हमने मुख्यमंत्री और संस्कृति मंत्री से जांच की मांग की है। एक तरफ सरकार औरंगजेब की जगह छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े इतिहास को संजो रही है, दूसरी तरफ अधिकारी किसी भी स्मारक और इमारत को बिना तथ्य जाने औरंगजेब की हवेली के नाम से संरक्षित कर रहे हैं। आगरा टूरिस्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन अध्यक्ष संदीप अरोड़ा ने बताया कि ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ क्यों और किसके दबाव में की गई, यह सामने आना चाहिए।
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श्रीकृष्ण लीला समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि 1938 से लगातार यहां श्रीकृष्ण लीला का मंचन होता आया है। अचानक राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे औरंगजेब की हवेली बता दिया। इसके ऐतिहासिक दस्तावेज कहां हैं। मैंने संस्कृति मंत्री और प्रमुख सचिव से जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आए।
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हमारा आगरा के अध्यक्ष ओम शर्मा ने कहा कि राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारी विरासत बचाने की जगह विनाश करने पर तुले हैं। सिकंदरा क्षेत्र में लोदी काल की कई धरोहरें हाल में ही ध्वस्त हो गई। इन्हें बचाने की जगह मनमाने तरीके से इतिहास को बदलने में लगे हैँ। इस मामले में मुख्यमंत्री खुद हस्तक्षेप करें और जांच कराएं।