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चंबल में बाढ़ : फसलें नष्ट होने से चारे का संकट
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बाह। चंबल की बाढ़ में बाह के 38 गांवों के किसानों की बाजरा, तिल और सब्जियों की फसल उजड़ गई हैं। झोपड़ियों में रखा भूसा आदि बाढ़ के पानी के साथ बह गया। फसलें के साथ भूसा नष्ट होने से ग्रामीणों को चारे के संकट से जूझना पड़ रहा है। बीहड़ के खादर और रास्ते दलदल से भरे हुए हैं। मवेशी के दलदल में फंस जाती हैं। मवेशी को दलदल से बचाने की चुनौती से पशु पालक जूझ रहे हैं। बाढ़ के बाद चंबल नदी के जलस्तर में बुधवार को भी गिरावट जारी रही। 6 दिन में नदी का जलस्तर 16 मीटर घट कर 134 मीटर से 118 मीटर रह गया है। चंबल नदी भले ही सामान्य हो गई है, बाढ़ प्रभावित गांवों की गलियों में कीचड़ गंदगी है तो बीहड़ के रास्ते, खादर में दलदल से भरे हैं। बाह के गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, पुरा शिवलाल, गुढ़ा, झरनापुरा, भगवानपुरा, मऊ की मढै़या, पिनाहट के उमरैठा पुरा, क्योरी, बीच का पुरा, रेहा, डगोरा, कछियारा गांव की गली और घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया था। सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह, भगवानपुरा के प्रधान बच्छराज सिंह, रेहा के प्रधान अजय कौशिक ने बताया कि बाढ़ में झोंपड़ियां, भूसे के कूप बह गए। खेतों में फसल नष्ट हो गई। ऐसे में चारे के संकट से बाढ़ प्रभावित गांवों के पशु पालक जूझ रहे हैं। चारे के लिए भी पशु पालकों की आर्थिक सहायता की उन्होंने मांग की है। गोहरा के राकेश यादव, भगवानपुरा के सुनील, झरनापुरा के नेत्रपाल वर्मा ने बताया कि बीहड़ में पशु चरने को जाते हैं तो दलदल में फंसने का डर रहता है। फंसे हुए पशुओं को दलदल से निकालना मुश्किल हो जाता है।
चंबल में बाढ़: सामान्य हुई नदी में गोते लगाने लगी डॉल्फिन
उफान के बहाव में नहीं बदलती हैं ठिकाना, लहरों से लड़ने में सक्षम
बाह। बाढ़ के बाद सामान्य हुई चंबल में डॉल्फिन का गोते लगाने के रोमांचक दृश्य दिखने लगे हैं। बाह रेंज में जनवरी-फरवरी में हुई गणना में 24 डॉल्फिन मिली थी। राजस्थान से सटे रेहा से लेकर इटावा से लगे उदयपुर खुर्द तक घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन आदि के विचरण की टोह लेने में वन विभाग की टीमें जुटी हैं। बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि बाढ़ के दौरान पानी की लहरों से लड़ने में डॉल्फिन माहिर होती हैं। घड़ियाल, मगरमच्छ बाढ़ में बाह से बहकर इटावा के पचनदा तक पहुंच जाते हैं। लेकिन वयस्क डॉल्फिन बाह रेंज की सीमा को बहुत कम पार कर पाती हैं। बच्चों के बहने का अंदेशा जरूर रहता है। वन विभाग की टीमें जलीय जीवों पर लगातार निगरानी रख रही है। राहत की बात ये है कि तटवर्तीय इलाके में डॉल्फिन के गोते सुकून देने वाले हैं। बता दें कि 5 अक्टूबर 2009 में गंगेय डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित कर चंबल नदी में संरक्षण किया जा रहा है।
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चंबल में बाढ़: सामान्य हुई नदी में गोते लगाने लगी डॉल्फिन
उफान के बहाव में नहीं बदलती हैं ठिकाना, लहरों से लड़ने में सक्षम
बाह। बाढ़ के बाद सामान्य हुई चंबल में डॉल्फिन का गोते लगाने के रोमांचक दृश्य दिखने लगे हैं। बाह रेंज में जनवरी-फरवरी में हुई गणना में 24 डॉल्फिन मिली थी। राजस्थान से सटे रेहा से लेकर इटावा से लगे उदयपुर खुर्द तक घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन आदि के विचरण की टोह लेने में वन विभाग की टीमें जुटी हैं। बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि बाढ़ के दौरान पानी की लहरों से लड़ने में डॉल्फिन माहिर होती हैं। घड़ियाल, मगरमच्छ बाढ़ में बाह से बहकर इटावा के पचनदा तक पहुंच जाते हैं। लेकिन वयस्क डॉल्फिन बाह रेंज की सीमा को बहुत कम पार कर पाती हैं। बच्चों के बहने का अंदेशा जरूर रहता है। वन विभाग की टीमें जलीय जीवों पर लगातार निगरानी रख रही है। राहत की बात ये है कि तटवर्तीय इलाके में डॉल्फिन के गोते सुकून देने वाले हैं। बता दें कि 5 अक्टूबर 2009 में गंगेय डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित कर चंबल नदी में संरक्षण किया जा रहा है।
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