{"_id":"67495ee605f0b3426e0bb2a8","slug":"advantages-and-disadvantages-of-electricity-privatization-torrent-power-in-agra-since-2010-better-facilities-2024-11-29","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: बिजली निजीकरण से फायदा या नुकसान...आगरा में वर्ष 2010 से टोरंट पावर, जानें क्या-क्या हुआ बदलाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: बिजली निजीकरण से फायदा या नुकसान...आगरा में वर्ष 2010 से टोरंट पावर, जानें क्या-क्या हुआ बदलाव
Fri, 29 Nov 2024 11:57 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 29 Nov 2024 11:57 AM IST
सार
बिजली निजीकरण से फायदा होगा या नुकसान ये सवाल उन लोगों के लिए जरूर है, जो अभी सरकारी व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। आगरा में 2010 में टोरंट पावर को ये व्यवस्था सौंपी गई थी। इसके बाद से उपभोक्ताओं को सुविधाएं बेहतर मिली हैं।
विज्ञापन
यूपी में बिजली व्यवस्था
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण को ओडिशा की तर्ज पर निजी हाथों में सौंपने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार ने तैयार किया है। आगरा में 14 साल पहले 1 अप्रैल 2010 को ही बिजली निजी कंपनी टोरंट पावर को दे दी गई थी। प्रदेश में सबसे पहले बिजली वितरण नेटवर्क आगरा में ही निजी हाथों में सौंपा गया। 20 साल के लिए करार किया। आगरा के बिजली उपभोक्ताओं को निजीकरण से बेहतर सुविधाएं मिली हैं, हालांकि सरकारी कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ हैं।
विज्ञापन
लागू होगा ओडिशा का पीपीपी मॉडल
ओडिशा में दो साल पहले ओडिशा सरकार और टाटा पावर ने पीपीपी मॉडल से बिजली वितरण व्यवस्था में बदलाव किया। आगरा में फ्रेंचाइजी मॉडल है, जिसमें डीवीवीएनएल लाइसेंसी है, जबकि टोरंट पावर फ्रेंचाइजी कंपनी। टोरंट पावर के पास दक्षिणांचल की संपत्तियों की मिल्कियत नहीं है। ओडिशा मॉडल में प्राइवेट कंपनी पर 51 फीसदी और सरकार का हिस्सा 49 फीसदी है। इससे कंपनी के पास मिल्कियत है और बिजली की खरीद, जरूरी बदलाव में निर्णय लेने की क्षमता है। लाभ और हानि का हिस्सा शेयर के मुताबिक बना रहेगा। प्रदेश सरकार दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का ओडिशा की तरह ही पीपीपी मॉडल पर निजीकरण करने वाली है।
ये भी पढ़ेंं - UP: ये पांच तस्वीरें वहां की हैं, जहां होता है कोख में कत्ल, गर्भपात की किट- दवाएं और...पुलिस भी रह गई हैरान
ओडिशा में दो साल पहले ओडिशा सरकार और टाटा पावर ने पीपीपी मॉडल से बिजली वितरण व्यवस्था में बदलाव किया। आगरा में फ्रेंचाइजी मॉडल है, जिसमें डीवीवीएनएल लाइसेंसी है, जबकि टोरंट पावर फ्रेंचाइजी कंपनी। टोरंट पावर के पास दक्षिणांचल की संपत्तियों की मिल्कियत नहीं है। ओडिशा मॉडल में प्राइवेट कंपनी पर 51 फीसदी और सरकार का हिस्सा 49 फीसदी है। इससे कंपनी के पास मिल्कियत है और बिजली की खरीद, जरूरी बदलाव में निर्णय लेने की क्षमता है। लाभ और हानि का हिस्सा शेयर के मुताबिक बना रहेगा। प्रदेश सरकार दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का ओडिशा की तरह ही पीपीपी मॉडल पर निजीकरण करने वाली है।
ये भी पढ़ेंं - UP: ये पांच तस्वीरें वहां की हैं, जहां होता है कोख में कत्ल, गर्भपात की किट- दवाएं और...पुलिस भी रह गई हैरान
विज्ञापन
विज्ञापन
ये हुए बदलाव
- पूरे शहर का बिजली वितरण नेटवर्क भूमिगत हुआ
- आंधी, तूफान, बारिश में बिजली कटौती कम हुई
- 33 केवी के 27 सबस्टेशनों को रिंग के जरिए जोड़ा गया
- तकनीकी खराबी में दूसरे स्टेशन से बिजली की आपूर्ति
- 27 सबस्टेशनों को स्काडा सिस्टम से जोड़ा गया
- 29 सबस्टेशन कर्मचारी रहित, कंट्रोल रूम से निगरानी
- बिजली फॉल्ट मरम्मत का समय 4 घंटे से घटकर एक घंटे हुआ
- ओवरलोडिंग के कारण इस साल कोई ट्रांसफार्मर नहीं फुंका
- बिजली बिल जमा करने की कतारें खत्म, ऑनलाइन सिस्टम भी
- पहले 2.25 लाख विद्युत उपभोक्ता थे, अब 5 लाख से ज्यादा
- बिजली कटौती में कमी, तार टूटने, फेज उड़ने की शिकायतें कम
ये भी पढ़ेंं - तीन डॉक्टर की मौत: बेटे को सेहरे में नहीं कफन में लिपटा देखा...बेसुध हुए माता-पिता, करुण क्रंदन ने चीरा कलेजा
- पूरे शहर का बिजली वितरण नेटवर्क भूमिगत हुआ
- आंधी, तूफान, बारिश में बिजली कटौती कम हुई
- 33 केवी के 27 सबस्टेशनों को रिंग के जरिए जोड़ा गया
- तकनीकी खराबी में दूसरे स्टेशन से बिजली की आपूर्ति
- 27 सबस्टेशनों को स्काडा सिस्टम से जोड़ा गया
- 29 सबस्टेशन कर्मचारी रहित, कंट्रोल रूम से निगरानी
- बिजली फॉल्ट मरम्मत का समय 4 घंटे से घटकर एक घंटे हुआ
- ओवरलोडिंग के कारण इस साल कोई ट्रांसफार्मर नहीं फुंका
- बिजली बिल जमा करने की कतारें खत्म, ऑनलाइन सिस्टम भी
- पहले 2.25 लाख विद्युत उपभोक्ता थे, अब 5 लाख से ज्यादा
- बिजली कटौती में कमी, तार टूटने, फेज उड़ने की शिकायतें कम
ये भी पढ़ेंं - तीन डॉक्टर की मौत: बेटे को सेहरे में नहीं कफन में लिपटा देखा...बेसुध हुए माता-पिता, करुण क्रंदन ने चीरा कलेजा