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डाटा फीडिंग में गड़बड़ी या फिर किसानों के साथ मजाक
Updated Sun, 17 Sep 2017 11:59 PM IST
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मैनपुरी। सरकार ने ऋण मोचन योजना के तहत किसानों का कर्ज माफ तो कर दिया। ऐसा करने से जहां एक तरफ किसानों को राहत दी है। वहीं दूसरी ओर कई किसान ऐसे हैं जो प्रमाणपत्र को देखकर खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सरकार उन पर महरबान तो हुई, लेकिन सिर्फ 34 पैसे, एक व दो रुपये के लिए।
प्रदेश सरकार ने किसान ऋण मोचना के तहत किसानों के कर्ज को माफ किया था। इसके लिए 11 सितंबर को कैंप लगाकर प्रमाणपत्रों का वितरण किया, लेकिन लोगों को प्रमाणपत्र देखकर आर्श्चय हुआ। माफ की गई धनराशि 34 पैसे देखी। वहीं पूरे जिले में लगभग सौ किसान ऐसे हैं। जिनकी माफ की गई कर्ज की धनराशि 34पैसे से लेकर 20 रुपये तक है। इसे लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हर किसी के मुख पर इसी को लेकर चर्चा है। कोई इसे सरकार की ओर से किसानों के साथ किया गया मजाक बोल रहा है तो कई किसानों ने इसमें धांधली का आरोप लगाया है। वहीं कुछ किसानों ने लेखपाल के द्वारा धोखाधड़ी का आरोप भी लगाया।
मैनपुरी ब्लॉक के जसरऊ निवासी बृजेश कुमार का कहना है कि उसने फसल के लिए एक लाख रुपये का ऋण लिया था। उक्त ऋण अभी तक उसने वापस नहीं किया है। इसके बाद भी उसे मात्र 34 पैसे ऋण माफी का प्रमाणपत्र मिला है। उनका कहना है कि इसके बारे में अधिकारियों से बात करेंगे। जरूरत पड़ी तो डीएम से भी इसकी शिकायत की जाएगी। घिरोर के नगला छेड़ी निवासी कुंवरपाल का कहना है कि डाटा फीडिंग के दौरान लेखपालों ने गलत जानकारी उपलब्ध कराई है।
प्रदेश सरकार ने किसान ऋण मोचना के तहत किसानों के कर्ज को माफ किया था। इसके लिए 11 सितंबर को कैंप लगाकर प्रमाणपत्रों का वितरण किया, लेकिन लोगों को प्रमाणपत्र देखकर आर्श्चय हुआ। माफ की गई धनराशि 34 पैसे देखी। वहीं पूरे जिले में लगभग सौ किसान ऐसे हैं। जिनकी माफ की गई कर्ज की धनराशि 34पैसे से लेकर 20 रुपये तक है। इसे लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हर किसी के मुख पर इसी को लेकर चर्चा है। कोई इसे सरकार की ओर से किसानों के साथ किया गया मजाक बोल रहा है तो कई किसानों ने इसमें धांधली का आरोप लगाया है। वहीं कुछ किसानों ने लेखपाल के द्वारा धोखाधड़ी का आरोप भी लगाया।
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मैनपुरी ब्लॉक के जसरऊ निवासी बृजेश कुमार का कहना है कि उसने फसल के लिए एक लाख रुपये का ऋण लिया था। उक्त ऋण अभी तक उसने वापस नहीं किया है। इसके बाद भी उसे मात्र 34 पैसे ऋण माफी का प्रमाणपत्र मिला है। उनका कहना है कि इसके बारे में अधिकारियों से बात करेंगे। जरूरत पड़ी तो डीएम से भी इसकी शिकायत की जाएगी। घिरोर के नगला छेड़ी निवासी कुंवरपाल का कहना है कि डाटा फीडिंग के दौरान लेखपालों ने गलत जानकारी उपलब्ध कराई है।
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