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पांच सालों में के बाद भी पेयजल समस्या जस की तस
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:46 PM IST
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भोगांव। नगर पंचायत का दर्जा होने के बाद भी भोगांव के हालात गांव जैसे ही हैं। जीटी रोड किनारे बसे कसबे में पेयजल की समस्या बहुत पुरानी है। नगर पंचायत की उदासनीता से कसबे की मुख्य गलियों में भी पूरे दिन गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। बाजार में दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण किए जाने से लोगों को पूरे दिन जाम से जूझना पड़ता है।
वर्ष 2007 में आदर्श नगर पंचायत का दर्जा हासिल कर चुकी नगर पंचायत भोगांव के हालात किसी गांव से कम नहीं हैं। नगर में काफी पहले बनवाया गया एकमात्र पार्क खत्म कर दिया गया है। वर्ष 2007 में गांधी उद्यान पार्क के साथ ही घंटाघर का कायाकल्प किया गया था। रात में पूरे नगर में जनरेटर से विद्युत आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध कराई।
बीते कार्यकाल में गांधी उद्यान को तोड़कर पार्क खत्म कर नगर पंचायत की दुकानों का निर्माण करा दिया गया और पार्क में नगर पंचायत का कबाड़ा भर दिया गया। शासन से सबसे अधिक धनराशि स्वीकृत होने के बाद भी पूरे नगर में कोई पार्क का निर्माण नहीं हो सका है। पूरे नगर में पेयजल की समस्या विकराल है। मुख्य बाजार में दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण से साल भर बाजार में जाम के हालात रहते हैं। नव विकसित कालोनियों में कोई सुविधा नहीं है। सफाईकर्मियों की मनमानी से साल भर मुख्य बाजार में भी पूरे दिन गंदगी के ढेर लगे रहते हैं।
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वर्ष 2007 में आदर्श नगर पंचायत का दर्जा हासिल कर चुकी नगर पंचायत भोगांव के हालात किसी गांव से कम नहीं हैं। नगर में काफी पहले बनवाया गया एकमात्र पार्क खत्म कर दिया गया है। वर्ष 2007 में गांधी उद्यान पार्क के साथ ही घंटाघर का कायाकल्प किया गया था। रात में पूरे नगर में जनरेटर से विद्युत आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध कराई।
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बीते कार्यकाल में गांधी उद्यान को तोड़कर पार्क खत्म कर नगर पंचायत की दुकानों का निर्माण करा दिया गया और पार्क में नगर पंचायत का कबाड़ा भर दिया गया। शासन से सबसे अधिक धनराशि स्वीकृत होने के बाद भी पूरे नगर में कोई पार्क का निर्माण नहीं हो सका है। पूरे नगर में पेयजल की समस्या विकराल है। मुख्य बाजार में दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण से साल भर बाजार में जाम के हालात रहते हैं। नव विकसित कालोनियों में कोई सुविधा नहीं है। सफाईकर्मियों की मनमानी से साल भर मुख्य बाजार में भी पूरे दिन गंदगी के ढेर लगे रहते हैं।
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