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बच्चों के भविष्य पर अधिकारियों का ताला
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कमरे में लगे किताबों के ढेर।
- फोटो : SELF
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मैनपुरी/किशनी। जिले में सर्व शिक्षा अभियान का मखौल बनाया जा रहा है। छात्रों की पढ़ाई के लिए आईं किताबों पर वर्ष भर ताला लगा रहा। लाखों रुपये कीमत की हजारों किताबें बीआरसी केंद्र के कमरों में बंद रहीं। किसी को वितरण तक नहीं की गईं। छात्रों को पुरानी किताबों से ही पढ़ना पड़ा। पोल खुलने पर जिम्मेदार लोग बगल झांकते नजर आ रहे हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के छात्रों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाता है। जिले में जिस प्रकार से इस अभियान को पलीता लगाया गया है, उसका किसी को अंदाजा नहीं होगा। जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राप्त हुई हजारों किताबें बीआरसी केंद्र व संकुल केंद्रों पर पड़ी हुई हैं। बीआरसी केंद्र किशनी पर हजारों की संख्या में किताबें आज भी मीना कक्ष और बीआरसी केंद्र के हॉल में धूल फांक रही हैं। ये किताबें रद्दी हो चुकी हैं। आखिर ये किताबें बच्चों को क्यों वितरित नहीं की गईं, इसका बीआरसी केंद्र पर किसी के पास जवाब नहीं है।
30 जुलाई तक वितरित होनी थीं किताबें
30 जुलाई 2018 तक सर्व शिक्षा अभियान के तहत आने वाली किताबों को स्कूलों में बच्चों को वितरित कराया जाना था। इन किताबों की तरफ शिक्षाधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। बड़ी संख्या में किताबें बीआरसी केंद्र और संकुल केंद्रों पर पड़ी हुई हैं। इससे सरकार के लाखों रुपये बर्बाद कर रद्दी कर दिए गए हैं।
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नवीन सत्र के लिए भी जा चुकी है छात्र संख्या
नवीन शिक्षा सत्र जो अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, उसके लिए भी सितंबर 2018 के तहत छात्र संख्या राज्य परियोजना निदेशक को भेज दी गई है। उसके अनुसार ही नई किताबें उपलब्ध होंगी। कई विषयों में तो पाठ भी बदले गए हैं। आखिर ये रखी हुई लाखों रुपयों की किताबों के लिए कौन जिम्मेदार होगा।
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के छात्रों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाता है। जिले में जिस प्रकार से इस अभियान को पलीता लगाया गया है, उसका किसी को अंदाजा नहीं होगा। जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राप्त हुई हजारों किताबें बीआरसी केंद्र व संकुल केंद्रों पर पड़ी हुई हैं। बीआरसी केंद्र किशनी पर हजारों की संख्या में किताबें आज भी मीना कक्ष और बीआरसी केंद्र के हॉल में धूल फांक रही हैं। ये किताबें रद्दी हो चुकी हैं। आखिर ये किताबें बच्चों को क्यों वितरित नहीं की गईं, इसका बीआरसी केंद्र पर किसी के पास जवाब नहीं है।
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30 जुलाई तक वितरित होनी थीं किताबें
30 जुलाई 2018 तक सर्व शिक्षा अभियान के तहत आने वाली किताबों को स्कूलों में बच्चों को वितरित कराया जाना था। इन किताबों की तरफ शिक्षाधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। बड़ी संख्या में किताबें बीआरसी केंद्र और संकुल केंद्रों पर पड़ी हुई हैं। इससे सरकार के लाखों रुपये बर्बाद कर रद्दी कर दिए गए हैं।
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नवीन सत्र के लिए भी जा चुकी है छात्र संख्या
नवीन शिक्षा सत्र जो अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, उसके लिए भी सितंबर 2018 के तहत छात्र संख्या राज्य परियोजना निदेशक को भेज दी गई है। उसके अनुसार ही नई किताबें उपलब्ध होंगी। कई विषयों में तो पाठ भी बदले गए हैं। आखिर ये रखी हुई लाखों रुपयों की किताबों के लिए कौन जिम्मेदार होगा।