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ताज: हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषण से असर पर की जाएगी रिसर्च
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:05 PM IST
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आगरा। ताजमहल के मुख्य गुंबद के अंदर संगमरमर का रंग क्यों बदला? यमुना नदी में भारी प्रदूषण के कारण होने वाली रासायनिक क्रियाओं का ताज के संगमरमर पर क्या असर पड़ा? भूगर्भ जल में घातक तत्वों की मौजूदगी से ताज की नींव वाली मिट्टी की प्रकृति में क्या बदलाव हुए?
यह तीनों वह सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने जांच शुरू कर दी है। ताज के पास हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषण के कारण पड़ रहे असर की जांच के लिए एएसआई रसायन शाखा ने टीमों का गठन कर दिया है जो मुख्य गुंबद के असर संगमरमर के रंग बदलने, यमुना प्रदूषण से पत्थर में बदलाव और मिट्टी की प्रकृति में परिवर्तन का अध्ययन करेंगी।
यमुना नदी के किनारे मौजूद पुरातत्व स्मारकों के पत्थरों पर प्रदूषण का असर जांचने के लिए एएसआई की टीम मथुरा तक जाएगी। नदी किनारे जितने भी स्मारक हैं, उन सभी का अध्ययन किया जाएगा। खासकर उन स्मारकों पर फोकस किया जाएगा, जहां यमुना नदी का जल स्मारकों को छूते हुए गुजर रहा है।
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जांच टीमें संगमरमर के साथ रेड सैंड स्टोन की प्रकृति और रसायनों के साथ प्रदूषण तत्वों की रासायनिक क्रियाओं से हुए बदलाव को भी देखेंगी। यूनेस्को के सहयोग से आगरा किला में मौजूद लैब का भी इस जांच में सहयोग लिया जाएगा।
अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डा. एमके भटनागर ने बताया कि ‘ताजमहल पर प्रदूषण का कितना असर पड़ रहा है, यह जांच में देखा जाएगा। हमने टीमों का गठन कर दिया है जो इन सभी सवालों का जवाब तलाशेंगी। यह अध्ययन प्रदूषण से निपटने और ताज के संरक्षण में काफी मददगार साबित होगा’
जनवरी में आएगी सैंपल जांच रिपोर्ट
एएसआई रसायन शाखा ने मडपैक थेरेपी के दौरान ही गंदगी के सैंपल एकत्रित किए थे। ताज के मुख्य गुंबद, उत्तर पश्चिमी, उत्तर पूर्वी, दक्षिण पश्चिमी और दक्षिण पूर्वी मीनार के साथ बुर्ज के गुंबदों पर जमा गंदगी के सैंपल लेकर जांच शुरू की थी, जिसकी रिपोर्ट जनवरी में आ सकती है।
ऐसी ही एक रिपोर्ट ने देश और दुनिया में हड़कंप मचा दिया था। आईआईटी के साथ एएसआई और जार्जिया यूनिवर्सिटी ने ताज के संगमरमर पर बायोमास और कार्बन कणों का खुलासा किया था, जिसके बाद संसद से लेकर मंत्रालय तक में आवाज उठी और पूरे ताजमहल पर मडपैक कराना पड़ा।
एएसआई अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डा. एमके भटनागर द्वारा तैयार की जा रही इस रिपोर्ट में प्रदूषण को लेकर कई नई चीजें सामने आ सकती हैं।
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यह तीनों वह सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने जांच शुरू कर दी है। ताज के पास हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषण के कारण पड़ रहे असर की जांच के लिए एएसआई रसायन शाखा ने टीमों का गठन कर दिया है जो मुख्य गुंबद के असर संगमरमर के रंग बदलने, यमुना प्रदूषण से पत्थर में बदलाव और मिट्टी की प्रकृति में परिवर्तन का अध्ययन करेंगी।
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यमुना नदी के किनारे मौजूद पुरातत्व स्मारकों के पत्थरों पर प्रदूषण का असर जांचने के लिए एएसआई की टीम मथुरा तक जाएगी। नदी किनारे जितने भी स्मारक हैं, उन सभी का अध्ययन किया जाएगा। खासकर उन स्मारकों पर फोकस किया जाएगा, जहां यमुना नदी का जल स्मारकों को छूते हुए गुजर रहा है।
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जांच टीमें संगमरमर के साथ रेड सैंड स्टोन की प्रकृति और रसायनों के साथ प्रदूषण तत्वों की रासायनिक क्रियाओं से हुए बदलाव को भी देखेंगी। यूनेस्को के सहयोग से आगरा किला में मौजूद लैब का भी इस जांच में सहयोग लिया जाएगा।
अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डा. एमके भटनागर ने बताया कि ‘ताजमहल पर प्रदूषण का कितना असर पड़ रहा है, यह जांच में देखा जाएगा। हमने टीमों का गठन कर दिया है जो इन सभी सवालों का जवाब तलाशेंगी। यह अध्ययन प्रदूषण से निपटने और ताज के संरक्षण में काफी मददगार साबित होगा’
जनवरी में आएगी सैंपल जांच रिपोर्ट
एएसआई रसायन शाखा ने मडपैक थेरेपी के दौरान ही गंदगी के सैंपल एकत्रित किए थे। ताज के मुख्य गुंबद, उत्तर पश्चिमी, उत्तर पूर्वी, दक्षिण पश्चिमी और दक्षिण पूर्वी मीनार के साथ बुर्ज के गुंबदों पर जमा गंदगी के सैंपल लेकर जांच शुरू की थी, जिसकी रिपोर्ट जनवरी में आ सकती है।
ऐसी ही एक रिपोर्ट ने देश और दुनिया में हड़कंप मचा दिया था। आईआईटी के साथ एएसआई और जार्जिया यूनिवर्सिटी ने ताज के संगमरमर पर बायोमास और कार्बन कणों का खुलासा किया था, जिसके बाद संसद से लेकर मंत्रालय तक में आवाज उठी और पूरे ताजमहल पर मडपैक कराना पड़ा।
एएसआई अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद डा. एमके भटनागर द्वारा तैयार की जा रही इस रिपोर्ट में प्रदूषण को लेकर कई नई चीजें सामने आ सकती हैं।