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गार्डनर परिवार का 7 पीढ़ियों से है कासगंज से रिश्ता
Updated Tue, 20 Nov 2018 10:52 PM IST
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गार्डनर परिवार का 7 पीढ़ियों से है कासगंज से रिश्ता
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
करीब दो सौ वर्ष पूर्व ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में बढ़ते प्रभाव के दौरान इंग्लैंड से यहां आने वाले गार्डनर परिवार के लोग आज भी देश में रहते हैं। गार्डनर परिवार की सात पीढ़ियां यहां रह चुकीं हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्य कर रहीं हैं। जूलियन गार्डनर भी इसी परिवार के हैं। जिन्हें करीब 26 वर्ष पूर्व इंग्लैंड के हाउस ऑफ लार्ड में सदस्यता मिलनी थी जो उस समय इंग्लैंड में हुए राजनीतिक परिवर्तन के कारण नहीं मिल सकी। अब इस सदस्यता के मिलने के रास्ते भी बंद हो चुके हैं।
सबसे पहले 18वीं शताब्दी में कर्नल विलियम लिनियस गार्डनर भारत आए थे और उन्होंने जिले के छावनी गांव में हॉर्स रेजिमेंट की स्थापना की। तब से गार्डनर परिवार यहीं रहने लगा। उन्होंने अपनी बड़ी सैन्य टुकड़ी तैयार की। मूल रूप से कर्नल विलियम का जन्म आयरलैंड में हुआ था। बाद में वह ब्रिटिश आर्मी में अफसर रहे और इसके बाद उन्होंने भारत आकर अपनी छावनी बनाई। इन दो सौ वर्षों में गार्डनर परिवार की 7 पीढ़ियां यहां रह रहीं हैं। अब वे पूरी तरह से भारतीय संस्कृति में रच बस चुके हैं। मौजूदा समय में जूलियन गार्डनर सोरों के फतेहपुर में रहते हैं और यहीं एक स्कूल चलाते हैं और खेतीबाड़ी करते हैं। उनका पुत्र एसले गार्डनर सोरों में शिक्षक हैं। वहीं उनके चचेरे भाई जॉन गार्डनर हिंदी सिनेमा में अक्षय आनंद के नाम से पहचाने जाते हैं। उनके परिवार के लोग आज भी छावनी आते हैं। उनकी जमीनें, मकान व अन्य संपत्तियां यहां मौजूद हैं।
देश की आजादी के बाद यह परिवार 1992 में तब चर्चाओं में आया जब इंग्लैंड में कंजरवेटिब पार्टी के द्वारा उन्हें लार्ड परिवार का वंशज मानते हुए सदस्यता देने की तैयारी की। जूलियन गार्डनर ने इस संबंध में सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए, लेकिन इंग्लैंड में राजनीतिक परिवर्तन के कारण लेबर पार्टी सत्ता में आई और पार्टी ने हाउस ऑफ लार्ड की व्यवस्था निरस्त कर दी। तब से जूलियन गार्डनर के हाउस ऑफ लार्ड का सदस्य बनने का दावा निस्तारित नहीं हो सका।
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क्या कहते हैं जूलियन गार्डनर
कासगंज। जूलियन गार्डनर ने बताया कि उनके वंशज करीब दो सौ वर्ष पहले से यहां रहते हैं। वर्ष 1992 में हाउस ऑफ लॉर्ड में उन्हें सदस्य बनाया जाना था, लेकिन लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद हाऊस ऑफ लॉर्ड की व्यवस्था समाप्त कर दी। उन्होंने कहा कि अब हाउस ऑफ लार्ड का सदस्य बन पाना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि गार्डनर परिवार के लोग भारत में रहते हैं और सभी को भारत से असीम स्नेह है।
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करीब दो सौ वर्ष पूर्व ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में बढ़ते प्रभाव के दौरान इंग्लैंड से यहां आने वाले गार्डनर परिवार के लोग आज भी देश में रहते हैं। गार्डनर परिवार की सात पीढ़ियां यहां रह चुकीं हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्य कर रहीं हैं। जूलियन गार्डनर भी इसी परिवार के हैं। जिन्हें करीब 26 वर्ष पूर्व इंग्लैंड के हाउस ऑफ लार्ड में सदस्यता मिलनी थी जो उस समय इंग्लैंड में हुए राजनीतिक परिवर्तन के कारण नहीं मिल सकी। अब इस सदस्यता के मिलने के रास्ते भी बंद हो चुके हैं।
सबसे पहले 18वीं शताब्दी में कर्नल विलियम लिनियस गार्डनर भारत आए थे और उन्होंने जिले के छावनी गांव में हॉर्स रेजिमेंट की स्थापना की। तब से गार्डनर परिवार यहीं रहने लगा। उन्होंने अपनी बड़ी सैन्य टुकड़ी तैयार की। मूल रूप से कर्नल विलियम का जन्म आयरलैंड में हुआ था। बाद में वह ब्रिटिश आर्मी में अफसर रहे और इसके बाद उन्होंने भारत आकर अपनी छावनी बनाई। इन दो सौ वर्षों में गार्डनर परिवार की 7 पीढ़ियां यहां रह रहीं हैं। अब वे पूरी तरह से भारतीय संस्कृति में रच बस चुके हैं। मौजूदा समय में जूलियन गार्डनर सोरों के फतेहपुर में रहते हैं और यहीं एक स्कूल चलाते हैं और खेतीबाड़ी करते हैं। उनका पुत्र एसले गार्डनर सोरों में शिक्षक हैं। वहीं उनके चचेरे भाई जॉन गार्डनर हिंदी सिनेमा में अक्षय आनंद के नाम से पहचाने जाते हैं। उनके परिवार के लोग आज भी छावनी आते हैं। उनकी जमीनें, मकान व अन्य संपत्तियां यहां मौजूद हैं।
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देश की आजादी के बाद यह परिवार 1992 में तब चर्चाओं में आया जब इंग्लैंड में कंजरवेटिब पार्टी के द्वारा उन्हें लार्ड परिवार का वंशज मानते हुए सदस्यता देने की तैयारी की। जूलियन गार्डनर ने इस संबंध में सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए, लेकिन इंग्लैंड में राजनीतिक परिवर्तन के कारण लेबर पार्टी सत्ता में आई और पार्टी ने हाउस ऑफ लार्ड की व्यवस्था निरस्त कर दी। तब से जूलियन गार्डनर के हाउस ऑफ लार्ड का सदस्य बनने का दावा निस्तारित नहीं हो सका।
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क्या कहते हैं जूलियन गार्डनर
कासगंज। जूलियन गार्डनर ने बताया कि उनके वंशज करीब दो सौ वर्ष पहले से यहां रहते हैं। वर्ष 1992 में हाउस ऑफ लॉर्ड में उन्हें सदस्य बनाया जाना था, लेकिन लेबर पार्टी के सत्ता में आने के बाद हाऊस ऑफ लॉर्ड की व्यवस्था समाप्त कर दी। उन्होंने कहा कि अब हाउस ऑफ लार्ड का सदस्य बन पाना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि गार्डनर परिवार के लोग भारत में रहते हैं और सभी को भारत से असीम स्नेह है।