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पढ़ें साईं विवाद पर जयेंद्र सरस्वती का ये बयान

Mon, 30 Jun 2014 09:24 AM IST
Updated Mon, 30 Jun 2014 09:24 AM IST
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Sri Jayendra Saraswathi on a Visit to Shimla

साईं बाबा पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के विवादित बयान पर कांची कामकोटी पीठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने कहा ‘धर्मो रक्षति रक्षत:’। विद्वानजन इस जवाब के अपने अपने अर्थ निकाल रहे हैं। शनिवार की सुबह शिमला पहुंचे शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती से अमर उजाला ने साईं बाबा पर दिए गए शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती बयान पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो वे मंद मुस्कान बिखेरते हुए पहले तो प्रश्न के उत्तर को टाल गए।

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अधिक आग्रह पर बस इतना ही कहा ‘धर्मो रक्षति रक्षत:’ यानी जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या वह शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के पक्ष में खड़े हैं? क्योंकि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का दावा है कि उन्होंने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए यह बयान दिया है क्योंकि साईं बाबा को भगवान बताना हिन्दू धर्म को बांटना है।
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गणपति मंदिर के कुंभाभिषेक कार्यक्रम में करेंगे शिरकत

Sri Jayendra Saraswathi on a Visit to Shimla

शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती शनिवार सुबह नई दिल्ली से शिमला पहुंचे। वे रविवार को राजधानी के संकटमोचन मंदिर स्थित षोडश गणपति मंदिर के कुंभाभिषेक कार्यक्रम में भाग लेंगे। उन्होंने कालीदास की काव्य रचना ‘कुमारसंभव’ के श्लोक ‘हिमालयो नाम नगाधिराज:’ के माध्यम से देव भूमि हिमाचल की महता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं की इस धरती पर आकर सभी को आनंद की अनुभूति होती है। वे चौथी बार हिमाचल आए हैं। शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने कहा कि यह विज्ञान का युग है, लेकिन धर्म के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने संस्कार नहीं भूलने चाहिए।

भक्तों को शांति और उन्नति के लिए उन्होंने ‘भज गोविंद्म स्रोत पाठ’ करने का सुझाव दिया। रविवार कुंभाभिषेक कार्यक्रम के बाद शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती हवाई मार्ग से वापस कांची कामकोटी पीठ लौट जाएंगे।

क्या है विवाद

Sri Jayendra Saraswathi on a Visit to Shimla

पिछले दिनों शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने यह बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया था कि साईं बाबा भगवान नहीं हैं। उनके मंदिर नहीं बनने चाहिए और न ही हिन्दुओं को उनकी पूजा करनी चाहिए।

शंकराचार्य ने यहां तक कह दिया था कि साईं बाबा मुसलमान थे लेकिन मुस्लिम समुदाय भी उन्हें नहीं पूजता, इसलिए वह सर्व धर्म एकता के प्रतीक भी नहीं हैं।

उमा भारती शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के बयान का विरोध कर रही हैं जबकि अन्य शंकराचार्य खुल कर नहीं बोल रहे लेकिन वह कहीं न कहीं शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के मत से सहमत दिख रहे हैं।

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