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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Manali: President Droupadi Murmu to visit Hidimba Temple wearing special Himachali slippers made from hemp fib

मनाली: भांग के रेशों से बनी खास हिमाचली चप्पल पहन हिडिंबा मंदिर जाएंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

Tue, 06 Oct 2026 04:00 AM IST
Krishan Singh संजय भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, मनाली।
संजय भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, मनाली। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 06 Oct 2026 04:00 AM IST
सार

 7 अक्तूबर को हिडिंबा माता के दर्शन के लिए मनाली पहुंच रहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए अलग-अलग आकार की 10 पूलें मंगवाई हैं।

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Manali: President Droupadi Murmu to visit Hidimba Temple wearing special Himachali slippers made from hemp fib
हिमाचली पूलें (भांग के रेशों से बनी खास चप्पल)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचली पूलें (भांग के रेशों से बनी खास चप्पल) राष्ट्रपति के लिए खास मेहमाननवाजी का हिस्सा बनेंगी। 7 अक्तूबर को हिडिंबा माता के दर्शन के लिए मनाली पहुंच रहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए अलग-अलग आकार की 10 पूलें मंगवाई हैं। इनके अलावा राष्ट्रपति के साथ आने वाले अधिकारियों और अन्य लोगों के लिए भी 35 पूलें उपलब्ध करवाई जाएंगी। कुल 45 पूलों का ऑर्डर दिया गया है। भांग के पौधे के रेशों से तैयार होने वाली ये पारंपरिक पूलें कुल्लू की लोक संस्कृति और देव परंपरा से जुड़ी हैं। धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञ और देवकार्य के दौरान इन्हें पहनने की परंपरा रही है। हिडिंबा मंदिर में भी पूलें पहनकर प्रवेश करने पर कोई रोक नहीं है। मंदिर के समीप बने पंडाल में जूते खोलकर राष्ट्रपति पूलें पहनेंगी।

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उनके लिए अलग-अलग नाप की 10 पूलें अलग से पैक करवाई गई हैं, जिससे मौके पर उचित आकार की पूल उपलब्ध करवाई जा सके। गौरतलब है कि कुल्लू में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या देवकार्य के दौरान पूलें पहनी जाती है, जहां जूते पहनकर जाने की मनाही है, वहां पूलें पहनकर जा सकते है। स्थानीय कारीगर भांग के रेशों को तैयार कर उनसे पूलें बनाते हैं। इन्हें पारंपरिक तरीके से तैयार करने के बाद अलग-अलग रंगों में सजाया जाता है। हुइंड हिमाचली हैंडीक्राफ्ट मनाली की संचालक लक्ष्मी ठाकुर ने बताया कि कुल 45 पूलों का ऑर्डर मिला है। इनमें से 10 पूलें राष्ट्रपति के लिए अलग से पैक करने को कहा गया है। अन्य पूलें उनके साथ आने वाले अधिकारियों और अन्य लोगों को उपलब्ध करवाई जाएंगी। एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा ने बताया कि मंदिर के समीप पंडाल बनाया गया है। पंडाल से मंदिर तक जाने के लिए महामहिम को पूलें दी जाएंगी। 

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राष्ट्रपति को परोसी जाएगी हिमाचली धाम
तीन दिवसीय मनाली दौरे के दौरान राष्ट्रपति को हिमाचली धाम परोसी जाएगी। उनके लिए सिड्डू, बिलासपुर की धुली दाल, लाल चावल, बबरू, स्थानीय राजमाह, मीठी भात बनाई जाएगी। गुच्छी की सब्जी और सेपु बड़ी का मदरा भी महामहिम के भोजन में शामिल किया जाएगा। उनके लिए अलग-अलग दिन के लिए अलग मैन्यू तैयार किया गया है।

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राष्ट्रपति को भेंट की जाएगी कुल्लू की शॉल, टोपी और हिडिंबा माता की प्रतिमा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मनाली दौरे के दौरान कुल्लू शॉल, टोपी और हिडिंबा माता की प्रतिमा भेंट की जाएगी। उपायुक्त डॉ. अमित शर्मा ने बताया कि राष्ट्रपति के मनाली दौरे के दौरान उन्हें मनाली स्थित माता हिडिंबा मंदिर में हिडिंबा माता की प्रतिमा (मोहरा) भेंट की जाएगी। इसके बाद परिधि गृह में उन्हें कुल्लू की शॉल और टोपी से सम्मानित किया जाएगा। प्रतिमा राष्ट्रपति को भेंट किए जाने के बाद राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ाएगी। 

आज एम्स बिलासपुर से पहली बार निकलेंगे पांच स्वर्ण पदक विजेता
वहीं एम्स बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह में मंगलवार को संस्थान के पांच मेधावी प्रशिक्षु स्वर्ण पदक हासिल करेंगे। इन मेधावियों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मानित करेंगी। समारोह में एम्स से शिक्षा और प्रशिक्षण पूरा करने वाले 92 प्रशिक्षुओं को डिग्री प्रदान की जाएगी। इनमें एमबीबीएस के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक, नर्सिंग और पैरामेडिकल क्षेत्र में प्रशिक्षण पूरा करने वाले विद्यार्थी शामिल हैं। दीक्षांत समारोह में 2020 बैच के 43 एमबीबीएस विद्यार्थी, 2023 बैच के 14 एमडी-एमएस चिकित्सक, 2022 बैच के 26 नर्सिंग विद्यार्थी और नौ पैरामेडिकल विद्यार्थी डिग्री प्राप्त करेंगे। पांच विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक दिया जाएगा। दीक्षांत समारोह में प्रशिक्षुओं के पहनावे में हिमाचल की संस्कृति की झलक दिखाई देगी। प्रशिक्षुओं के लिए फॉर्मल हिमाचली परिधान को प्राथमिकता दी गई है। कुर्ता-पायजामा के साथ सदरी और हिमाचली टोपी पहनकर प्रशिक्षु समारोह में शामिल होंगे। राष्ट्रपति को हिमाचल की लोक कला से जुड़ा विशेष स्मृति चिह्न भी भेंट किया जाएगा। इसके लिए मंडी शैली का पारंपरिक रणसिंगा तैयार कराया गया है। रणसिंगा पर एम्स बिलासपुर का लोगो भी अंकित होगा। इसे मंडी के कलाकार से तैयार कराया जा रहा है। एम्स के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान में अध्ययन और प्रशिक्षण पूरा करने वाले विद्यार्थी अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे।

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