वार्षिक सर्वेक्षण में खुलासा: कांगड़ा बना हिमाचल की असंगठित अर्थव्यवस्था का पावरहाउस, 1.80 लाख को दिया रोजगार
केंद्र सरकार के पहले जिला-स्तरीय गैर-निगमित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण-2025 के अनुसार प्रदेश के कुल गैर-निगमित गैर-कृषि प्रतिष्ठानों में अकेले कांगड़ा की हिस्सेदारी 19.02 फीसदी है।
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हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा जिला कांगड़ा असंगठित अर्थव्यवस्था का पावरहाउस बनकर उभरा है। केंद्र सरकार के पहले जिला-स्तरीय गैर-निगमित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण-2025 के अनुसार प्रदेश के कुल गैर-निगमित गैर-कृषि प्रतिष्ठानों में अकेले कांगड़ा की हिस्सेदारी 19.02 फीसदी है। यानी हिमाचल के करीब हर पांचवां छोटा कारोबार कांगड़ा में संचालित हो रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से सितंबर में जारी रिपोर्ट में 770 जिलों के सैंपलिंग फ्रेम में शामिल 757 जिलों के लिए प्रतिष्ठानों, कामगारों, स्वामित्व, महिला भागीदारी, पंजीकरण और पारिश्रमिक जैसे प्रमुख संकेतकों के अनुमान जारी किए गए हैं। कांगड़ा में 1,01,813 गैर-निगमित प्रतिष्ठान संचालित हैं, जिनसे करीब 1.80 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
प्रतिष्ठानों की संख्या और रोजगार कांगड़ा प्रथम
प्रतिष्ठानों की संख्या और रोजगार, दोनों मामलों में जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है। राज्य के आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में हिमाचल में कुल 5.38 लाख गैर-निगमित गैर-कृषि प्रतिष्ठान सक्रिय थे, जिनसे 8.10 लाख लोग जुड़े थे। एक साल में प्रतिष्ठानों की संख्या में 3.8 फीसदी और रोजगार में 6.9 फीसदी की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट का एक अहम पहलू गैर-निगमित कारोबार का डिजिटल विस्तार भी है। एसबीआई रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार हिमाचल के 68.2 फीसदी गैर-निगमित प्रतिष्ठान इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह अनुपात देश के प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक बताया गया है। यानी प्रदेश के करीब हर तीन में से दो छोटे कारोबार डिजिटल माध्यम से जुड़े हैं।
शीर्ष जिलों में सिमटा कारोबार
कांगड़ा के बाद मंडी में 67,858, शिमला में 66,975, सिरमौर में 55,922, कुल्लू में 47,219, हमीरपुर में 45,396 और ऊना में 41,681 गैर-निगमित प्रतिष्ठान हैं। रोजगार के लिहाज से ऊना में 96,761, शिमला में 84,308, सोलन में 78,145 और मंडी में 75,078 कामगार इस क्षेत्र से जुड़े हैं।
मंडी में महिला उद्यमिता मजबूत
जिला स्तरीय आंकड़ों में महिला उद्यमिता भी महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में सामने आई है। मंडी में महिला स्वामित्व वाले प्रोपराइटरी प्रतिष्ठानों की हिस्सेदारी करीब 33 फीसदी है, जो प्रदेश के जिलों में सबसे अधिक है। इससे जिले के गैर-निगमित कारोबार में महिलाओं की मजबूत भागीदारी का संकेत मिलता है। देश के 237 जिलों में गैर-निगमित क्षेत्र के कुल कामगारों में महिलाओं की हिस्सेदारी कम से कम एक-तिहाई है।
सोलन में वेतनभोगी कामगार रखने वाले ज्यादा
सोलन में वेतन या पारिश्रमिक पर कामगार रखने वाले गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की हिस्सेदारी करीब 19 फीसदी है, जो प्रदेश के जिलों में सर्वाधिक बताई गई है। इससे पता चलता है कि सोलन के छोटे कारोबार में मालिक और परिवार के सदस्यों के अलावा बाहरी कामगारों को रोजगार देने की प्रवृत्ति भी अधिक है।