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Himachal: मानव विकास सूचकांक में हिमाचल देश में आगे; लोगों की औसत आयु और साक्षरता दर बढ़ी, गरीबी घटी

Mon, 27 Oct 2025 05:43 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 27 Oct 2025 05:43 PM IST
सार

 प्रदेश के मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश मानव विकास सूचकांक 0.78 है, जो राष्ट्रीय औसत 0.63 से अधिक है। 

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Loss of Rs 46,000 crore due to climate change and disaster in four years, reveals report
हिमाचल प्रदेश मानव विकास रिपोर्ट-2025। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश मानव विकास सूचकांक 0.78 है, जो राष्ट्रीय औसत 0.63 से अधिक है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश में लोगों की औसत आयु यानी जीवन प्रत्याशा 72.6 वर्ष हो गई है, जो राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले 3.6 फीसदी ज्यादा है। राष्ट्र स्तर पर औसत आयु 69 वर्ष आंकी गई है। वहीं, राज्य में साक्षरता दर 99.02 प्रतिशत पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत 81 प्रतिशत से काफी अधिक है। हिमाचल में 94.9 प्रतिशत पुरुष व 91.7 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं। देश में 84.4 प्रतिशत पुरुष और 71.5 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं। बहुआयामी गरीबी की दर 7.6 प्रतिशत से घटकर 4.9 प्रतिशत हो गई है, जो भारत के 14.9 प्रतिशत से मुकाबले काफी कम है। यह खुलासा यूएनडीपी के सहयोग से जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर तैयार हिमाचल प्रदेश मानव विकास रिपोर्ट 2025 में किया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को यह रिपोर्ट जारी की। इस मौके पर यूएनपीडी की इंडिया प्रमुख डॉ. एंजला लूसीकी भी मौजूद रहीं।

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रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 9.6 प्रतिशत बढ़कर राष्ट्रीय औसत से आगे निकल गई है। नवजात मृत्यु दर 1000 शिशुओं के पीछे प्रदेश में 20.5 है और देश में औसत 24.9 है। हालांकि, रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि पांच वर्ष से कम उम्र के 30 प्रतिशत से अधिक बच्चे अविकसित या कम वजन के हैं। सतत विकास मूल्य इंडेक्स में भी हिमाचल 77 के सूचकांक के साथ देश में पांचवें स्थान पर रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 71 है।




 

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जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक गंभीर वैश्विक समस्या बनकर उभरी है और यदि इसका तत्काल कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वर्तमान और भावी पीढ़ियों, दोनों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश हमेशा से पर्यावरण-अनुकूल विकास के प्रति सक्रिय और संवेदनशील रहा है और उसने सतत विकास की रूपरेखा अपनाई है। राज्य ने कभी भी अपने जंगलों, नदियों या पहाड़ों का गैर-जिम्मेदाराना दोहन नहीं किया है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के प्रभाव केवल एक स्थान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसके दूरगामी प्रभाव हैं।

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अर्थव्यवस्था में कम हो रही कृषि की हिस्सेदारी
रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल की अर्थव्यवस्था कृषि से दूर जा रही है। यह क्षेत्र राज्य के कुल कार्यबल के 54 प्रतिशत को रोजगार देता है। लेकिन यह सकल मूल्य वृद्धि (जीवीए) में केवल 14 प्रतिशत योगदान देती है, जिससे राज्य की आय में इसका हिस्सा उद्योग और सेवाओं से कम हो जाता है। उद्योग कुल कार्यबल का 22 प्रतिशत एवं सेवाएं 24 प्रतिशत को रोजगार देते हैं, लेकिन राज्य के जीवीए में इनका हिस्सा बहुत अधिक है। यह क्रमवार 40 और 45 प्रतिशत हैं। विनिर्माण क्षेत्र, विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का राज्य के जीवीए में लगभग 27 प्रतिशत है। पर्यटन का योगदान 7.8 प्रतिशत है।


 

जलवायु परिवर्तन विकास को बाधित करने का पैदा कर रहा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन हिमाचल के विकास को बाधित करने का खतरा पैदा कर रहा है। 1901 से औसत वार्षिक तापमान में 1.5 सेल्सियस की वृद्धि हुई है और अनुमान है कि सदी के मध्य तक तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा। 1 जून से 6 सितंबर 2025 के बीच की अवधि में 46 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जिसके कारण 366 लोगों की जान गई है और 4000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। ग्लेशियर प्रतिवर्ष 50 मीटर से अधिक की दर से पीछे हट रहे हैं और नई हिमनद झीलों के निर्माण से हिमनद झील विस्फोट का खतरा बढ़ गया है।


 

इंटरनेट का उपयोग करने में भी हिमाचल आगे
इंटरनेट का उपयोग करने के मामले में भी हिमाचल प्रदेश देश के औसत से आगे है। यहां पर 67.9 फीसदी पुरुष और 49.7 फीसदी महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं, जबकि देश में यह औसत क्रमवार 57.1 व 33.3 है।

कठिन परिस्थितियों में विकास की कहानी बयां रही है रिपोर्ट: सुक्खू
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश मानव विकास रिपोर्ट-2025 जारी करने के बाद कहा कि यह दस्तावेज राज्य की प्रगति, लचीलेपन और लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद यह रिपोर्ट विकास की अनुकरणीय कहानी प्रस्तुत करती है। हिमाचल ने हाल ही में पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है और राज्य की साक्षरता दर बढ़ी है। प्रदेश में शिशु मृत्यु दर घटना राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली की सफलता को दर्शाता है।

सुक्खू ने कहा कि सरकार ने न केवल सड़कों, उद्योगों, कृषि और बागवानी में निवेश किया है, बल्कि भविष्य के लिए एक आदर्श और मजबूत नींव बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, वृद्धजन देखभाल और ग्रामीण विकास जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी निवेश सुनिश्चित किया है। राज्य में जीने की औसत आयु बढ़ना स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र की सफलता का प्रतीक है। जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका तत्काल कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। राज्य ने कभी भी अपने जंगलों, नदियों या पहाड़ों का गैर-जिम्मेदाराना दोहन नहीं किया है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के प्रभाव केवल एक स्थान तक सीमित नहीं हैं। ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए राज्य सरकार ने 680 करोड़ रुपये की लागत से राजीव गांधी स्व-रोजगार स्टार्ट-अप योजना शुरू की है।

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