बेटे की बेहतर परवरिश और उसकी उम्मीदों को पंख देने में मां का किरदार कितना अहम है। इसका उदाहरण जेईई मेन्स में हिमाचल के टॉपर आकाश की मां अर्चना सोलंकी ने पेश किया है। भले ही जेईई के टॉपर आकाश हों, लेकिन पर्दे के पीछे की पूरी पटकथा उनकी मां ने दो साल पहले लिखनी शुरू कर दी थी।
बेटे की सफलता से मिला परिश्रम का फल: अर्चना
छठी से इंजीनियर बनने का ख्वाब देख रहे आकाश के लिए मां अर्चना ने करीब दो साल पहले अध्यापक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और बेटे की पढ़ाई में समर्पित हो गईं। आकाश के पिता अविनाश सोलंकी शिमला में कार्यरत हैं। ऐसे में आकाश की पूरी जिम्मेदारी मां ने निभाई है। पिता अविनाश ने भी इस सफलता का श्रेय माता अर्चना सोलंकी को दिया है।
आकाश ने कहा कि जब वह छठी कक्षा में थे तो उनकी आईआईटी सेक्टर में जाने की इच्छा थी। उन्होंने जीतोड़ मेहनत की। अपने मन में पैदा होने वाले प्रत्येक भ्रम को बाहर निकालकर ऊंचाइयों को छूने की सोच रखी। जेईई मेन्स की तैयारी के लिए अंबाला में कोचिंग ली, लेकिन घर में मां ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।
आकाश की माता अर्चना ने बताया कि आकाश पढ़ाई करने के अलावा बास्केटबॉल खेलने का शौक रखते हैं। आकाश पढ़ाई के लिए भरपूर समय देते हैं। बच्चे के सपनों को पूरा करना माता-पिता का दायित्व है। इसके लिए प्रयासरत रहना जरूरी है। कहा कि बेटे की सफलता से उन्हें उनके परिश्रम का फल मिल गया।
जेईई मेन्स में प्रथम स्थान पाने के बाद आकाश जेईई एडवांस की तैयारी करने में जुट गए हैं। आकाश ने बताया कि आगे का लक्ष्य पाने को सेल्फ स्टडी शुरू कर दी है। उन्होंने अन्य बच्चों को भी अपने लक्ष्य को निर्धारित करने का आह्वान किया। आकाश ने कोचिंग की बजाय सेल्फ स्टडी को तवज्जो दी है। कोचिंग के अलावा किसी मुकाम को पाने के लिए घर पर बैठकर पढ़ाई करने के बाद भी आगे सफलता पाई जा सकती है। इसके लिए कड़ी मेहनत व मन में लग्न को होना जरूरी है। बताया कि जीवन में किसी भी चीज को पाने के लिए लक्ष्य का निर्धारित होना लाजिमी है।