हिमाचल: शिक्षा विभाग में दिव्यांगजनों के आरक्षित पदों पर हुईं भर्तियां, अन्य महकमे अभी सुस्त; जानें विस्तार से
राज्य सचिवालय में बुधवार को दिव्यांगजनों से संबंधित मुद्दों की समीक्षा बैठक में अहम खुलासा हुआ। पता चला कि शिक्षा विभाग में दिव्यांगजनों के आरक्षित पदों पर भर्तियां कर दी गई हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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शिक्षा विभाग में दिव्यांगजनों के आरक्षित पदों पर भर्तियां कर दी गई हैं। पशुपालन और मुद्रण व लेखन विभाग ने भर्तियों के लिए विज्ञापन जारी कर दिए हैं। प्रदेश सरकार के अन्य महकमे भर्ती प्रक्रियाएं शुरू करने को लेकर अभी तक सुस्त हैं।
राज्य सचिवालय में बुधवार को दिव्यांगजनों से संबंधित मुद्दों की समीक्षा बैठक में यह खुलासा हुआ। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम का सशक्तिकरण विभाग (ईसोमसा) के निदेशक ने सभी विभागों को रोस्टर और बैकलॉग रिक्तियां भरने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान दृष्टिबाधित संघ ने सरकारी बसों में निशुल्क यात्रा को हिम बस कार्ड अनिवार्य ना करने का मामला उठाया। बिना शर्त आवास प्रदान करने को भी कहा। विकलांगता राहत भत्ता बढ़ाने, दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र राज्य आयुक्त की नियुक्ति करने और सेवानिवृत्ति आयु 58 साल की जगह 60 करने की भी मांग उठी।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम का सशक्तिकरण विभाग (ईसोमसा) के निदेशक सुमित खीमटा ने बताया कि अब तक केवल पशुपालन और मुद्रण एवं लेखा विभाग ने ही बैकलॉग पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए हैं। उन्होंने शेष विभागों से दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित शेष पदों को शीघ्र भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित जेबीटी पदों के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं।
कुल 119 जेबीटी पद भरे गए हैं, जिनमें 50 दृष्टिबाधित, 49 आर्थाेपेडिक रूप से अक्षम, 11 श्रवणबाधित, 8 बहु-दिव्यांगता वाले तथा 1 बौद्धिक रूप से अक्षम के लिए हैं। 94 टीजीटी पदों के लिए भी विज्ञापन जारी किया गया है। इसमें 26 दृष्टिबाधित, 22 श्रवणबाधित, 13 बौद्धिक रूप से अक्षम या ऑटिज्म स्पेक्ट्रम वाले तथा 10 बहु-दिव्यांगता वाले के लिए आरक्षित हैं। बैठक में एचआरटीसी बसों में निशुल्क यात्रा हेतु अनिवार्य हिम बस कार्ड की आवश्यकता के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। निदेशक ने दिव्यांगजनों को बस कार्ड प्राप्त करने में सहायता के लिए विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। हालांकि, दृष्टिबाधित संघ ने मांग की कि दिव्यांगजनों के लिए एचआरटीसी बसों में निशुल्क यात्रा को हिम बस कार्ड अनिवार्य न किया जाए। संघ ने इस मामले को हाईकोर्ट में भी चुनौती दी है।
दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत विकलांगता राहत भत्ता (डीआरए) बढ़ाने, सहारा पेंशन योजना का कार्यान्वयन करने, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत दृष्टिबाधित व्यक्तियों को बिना शर्त आवास प्रदान करने की मांग भी बैठक में उठी। निदेशक ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत विकलांगता राहत भत्ता (डीआरए) बढ़ाना तथा सेवानिवृत्ति आयु में वृद्धि नीतिगत मामले हैं, जिन पर राज्य सरकार निर्णय लेगी। दृष्टिबाधित संघ ने बताया कि सहारा पेंशन योजना का लाभ पिछले छह माह से लाभार्थियों को नहीं मिला है।