हिमाचल समेत कर्ज में डूबे कई राज्यों को नहीं मिलेगा बेलआउट पैकेज
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान 46,500 करोड़ के कर्ज में डूबे हिमाचल को फिलहाल केंद्र से बेलआउट पैकेज की राहत नहीं मिलेगी। इस मसले पर प्रधानमंत्री से बात हुई है। केंद्र का तर्क है कि देश में कई राज्य इस तरह कर्ज में डूबे हैं।
अगर एक स्टेट को बेलआउट पैकेज दिया जाता है तो वित्तीय संकट झेल रहे तमाम राज्य इस बेलआउट पैकेज की मांग करेंगे। लिहाजा, हिमाचल समेत देश में वित्तीय संकट झेल रहे किसी भी राज्य को यह पैकेज नहीं मिलेगा। प्रदेश के विकास में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लिए स्पेशल पैकेज अभी केंद्र में विचाराधीन है। जबकि विधायक निधि बढ़ाने का तोहफा दिया जा चुका है।
पूर्व कांग्रेस सरकार ने खड़ा किया बड़ा वित्तीय संकट
सीएम ने पूर्व सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस की पूर्व सरकार प्रदेश के लिए बड़ा वित्तीय संकट खड़ा कर गई है। यदि कांग्रेस सरकार के समय केंद्र सरकार ने राज्य को ऋण नहीं दिया होता तो शायद राज्य की ट्रेजरी बंद हो गई होती।
डेढ़ माह में किए काम गिनाए
प्रदेश के कर्मचारियों को 880 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ दिए
गुड़िया और होशियार हेल्पलाइन, शक्ति एप्प, लॉ एंड आर्डर ढर्रे पर लाया
69 घोषित एनएच में 36 की डीपीआर भेजी, 31 मार्च तक सभी डीपीआर
कुल्लू हवाई पट्टी को बढ़ाने की कवायद की तेज
मंडी के आसपास हवाई अड्डा के लिए जगह तलाशने के निर्देश
उड़ान योजना में जगह-जगह एयर कनेक्टिविटी के प्रयास
टूरिज्म दृष्टि से जंजैहली में पर्यटन विकास की 20 करोड़ की डीपीआर
महत्वाकांक्षी पठानकोट-जोगिंद्रनगर-मंडी-लेह के लिए पिछली तुलना में अधिक आर्थिक मदद
मंडी में पासपोर्ट बनाने की सुविधा
1134 करोड़ रुपये का बागवानी विकास प्रोजेक्ट
आगामी विस सत्र में कलस्टर विवि का प्रस्ताव
सीएम ने कहा कि अगले विस सत्र में कलस्टर विवि का प्रस्ताव लाया जाएगा। औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। केंद्र सरकार के कलस्टर विवि के तोहफे को पूर्व कांग्रेस सरकार जनता के लिए भुना नहीं पाई है। इस कलस्टर विवि से सूबे के मंडी, कुल्लू, बिलासपुर और लाहौल जिले के युवाओं को राहत मिलनी थी।
बीबीएमबी पैसा देने की स्थिति में नहीं, केंद्र से पक्ष रखेगी सरकार
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि बीबीएमबी फिलहाल पैसा देने की स्थिति में नही हैं। जहां तक सरप्लस लैंड की बात है, उसे सरकार अपने अधीन लेकर औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की संभावनाएं तलाश सकती है, लेकिन विस्थापितों की मांगों को भी दरकिनार नहीं किया जाएगा। विस्थापितों का पक्ष केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। राहत के हर प्रयास किए जाएंगे।