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HP Panchayat Election: तय नियम पूरे नहीं करने पर नई पंचायतों का पुनर्गठन अवैध, पुरानी स्थिति पर होंगे चुनाव

Wed, 01 Apr 2026 11:50 AM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 01 Apr 2026 11:50 AM IST
सार

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि इन पंचायतों का चुनावी रोस्टर नए सिरे से तैयार कर इसे 7 अप्रैल तक अंतिम रूप देकर प्रकाशित करे। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal High Court Directs State Government to Issue Reservation Roster by April 7 at All Costs
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि यदि नई पंचायतों के गठन या परिसीमन में तय कानूनी प्रक्रियाओं और समय-सीमा का पालन नहीं किया गया है, तो ऐसी प्रक्रियाएं अवैध मानी जाएंगी और चुनाव पुरानी स्थिति एवं पुराने परिसीमन के आधार पर ही कराए जाएं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि इन पंचायतों का चुनावी रोस्टर नए सिरे से तैयार कर इसे 7 अप्रैल तक अंतिम रूप देकर प्रकाशित करे। हाईकोर्ट ने संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित समय सीमा के भीतर ही पूरा करने के निर्देश दिए। खंडपीठ ने कहा कि जिन पंचायतों में पुनर्गठन वैध है, लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया गलत रही, वहां यह बदलाव इस चुनाव में नहीं, अगले चुनाव में लागू होगा। खंडपीठ ने महिला मंडल उमरी व अन्य 11 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। इसके कानूनी पहलू पर अभी फैसला आना बाकी है।

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खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत दो चरण अनिवार्य हैं। पहला धारा 3 के तहत सरकार की ओर से पंचायतों का निर्माण या विभाजन है और दूसरा कदम धारा 124 के तहत उपायुक्त (डीसी) की ओर से क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करना है। इन दोनों चरणों में नियमों का पालन अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि परिसीमन के लिए हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) नियम, 1994 के नियम 5, 6, 10 और 11 का पालन करना जरूरी है। इसमें प्रस्ताव पर 7 दिन का नोटिस, आपत्तियों के निपटारे के लिए 7 दिन और अपील के लिए 10 दिन का समय निर्धारित है।

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जहां समय सीमाओं का पालन नहीं हुआ, वहां परिसीमन को स्पष्ट रूप से अवैध करार दिया गया है। खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि लंबित कार्यवाही केवल उन्हीं मामलों को माना जाएगा, जिनमें 13 फरवरी से पहले प्रस्ताव अधिसूचित किया जा चुका था। 6 महीने से धूल फांक रही फाइलों पर अचानक लिए गए फैसलों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। उधर, सरकार की ओर से अधिवक्ता अनूप रत्न ने बताया कि अदालत का आदेश केवल उन्हीं पर लागू होगा, जिन्होंने हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाएं दायर की हैं।

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