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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Gucchi Rates In Himachal Pradesh found in forests Mandi District

यहां जंगलों में खाक छान रहीं महिलाएं, गुच्छी के मिल रहे 15 हजार रुपये

Sat, 30 Mar 2019 10:35 AM IST
अरविन्द ठाकुर फरेंद्र ठाकुर, अमर उजाला, मंडी
फरेंद्र ठाकुर, अमर उजाला, मंडी Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 30 Mar 2019 10:35 AM IST
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Gucchi Rates In Himachal Pradesh found in forests Mandi District
सराज में गुच्छी को सुखाने का काम करते हुए महिला। - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज में इस साल भारी बर्फबारी ने भले ही दुश्वारियां बढ़ाई हों मगर पहाड़ों में गुच्छी की अच्छी पैदावार भी हुई है। सराज की महिलाएं और बच्चे कामकाज छोड़कर जंगलों में खाक छान रहे हैं। यहां गुच्छी को डुंगलू भी कहते हैं। यह गुच्छी घाटी के लोगों का आय का साधन भी है।

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पिछले वर्ष घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गुच्छी की पैदावार में भारी गिरावट आई थी। सर्दी के बाद पहाड़ों से बर्फ पिघलने के बाद गुच्छी उगनी शुरू हो जाती है। गुच्छी को घरों में सुखाने के लिए रखा जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमत 12 से 15 हजार रुपए प्रति किलो है।
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व्यापारी इसे पहाड़ी क्षेत्रों से 2 से 3 हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदते हैं। जिले में सब्जी के तौर पर गुच्छी को पौष्टिक आहार भी माना जाता है। कई स्थानों पर धामों में गुच्छी की सब्जी बनाई जाती है। अमेरिका, फ्रांस और इटली के लोग भी इसकी सब्जी बनाते हैं।

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विदेशों में भी होता है निर्यात

Gucchi Rates In Himachal Pradesh found in forests Mandi District
गुच्छी - फोटो : फाइल फोटो

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर से गुच्छी का निर्यात अमेरिका, फ्रांस और इटली में होता है। इन देशों में इसकी अच्छी कीमत है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में गुच्छी कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, किन्नौर और सिरमौर के क्षेत्रों में पाई जाती है।

पहाड़ों में अलग-अलग धारणा
पहाड़ों में गुच्छी की अलग-अलग धारणा है। पहाड़ों में कुछ लोग इसे बिजली कड़कने की उपज मानते हैं तो कईयों का कहना है कि जंगलों में आग लगने के बाद गुच्छी उगती है। कई लोग कहते हैं कि यह मात्र कुंभ राशि वालों को ही मिलती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं गुच्छी के मुरीद

Gucchi Rates In Himachal Pradesh found in forests Mandi District

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी भी गुच्छी के मुरीद रहे हैं। वाजपेयी जब भी हिमाचल आते थे तो इसकी सब्जी खाते थे। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने पत्रकारों को बताया था कि उनकी सेहत का राज हिमाचल प्रदेश का मशरूम गुच्छी है। इसक अलावा औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी की विदेशों में भारी डिमांड है।

यूरोपियन देश फ्रांस, इंग्लैंड, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों में हिमाचल से भारी मात्रा में गुच्छी की सप्लाई की जाती है। सूबे के वन क्षेत्रों और बगीचों में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी को औषधि के लिए यूरोपियन देशों को निर्यात किया जा रहा है। यूरोपियन देशों में गुच्छी हिमाचल के भाव से चार गुना अधिक दामों पर बेची जा रही है। गुच्छी को दिल और अन्य रोगों के लिए आयुर्वेद में रामबाण माना गया है।

कुल्लू, शिमला, किन्नौर और मंडी जिलों में गुच्छी की पैदावार प्राकृतिक तौर पर जंगलों और बगीचों में होती है। गुच्छी को औषधि के अलावा देश-विदेश के नामी पांच सितारा होटलों में विशेष डिश के तौर पर परोसा जाता है। अकेले कुल्लू जिले में ही हर वर्ष गुच्छी से ग्रामीण 12 से 15 करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं जबकि हिमाचल में इसका कारोबार 70 करोड़ तक पहुंच जाता है।

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