नोटबंदी चंडीगढ़ में बेअसर, क्या शिमला में भी रहेगा असर?
नोटबंदी के बीच बीजेपी ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में एकतरफा जीत हासिल की है। पांच महीने बाद शिमला नगर निगम के भी चुनाव हैं, ऐसे में नोटबंदी का असर क्या शिमला के निगम चुनावों पर पड़ेगा या नहीं यह बड़ा सवाल है।
नोटबंदी के कारण शिमला की जनता विशेषकर यहां के कारोबारियों और आम लोगों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी है। बैंक एटीएम के बाहर कतारें अब तक खत्म नहीं हुई हैं। ऐसे में नोटबंदी का मुद्दा शिमला नगर निगम चुनावों में असरदार रहेगा या नहीं यह देखने वाली बात होगी।
चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों के नतीजों को नोटबंदी को लेकर रेफरेंडम माना जा रहा था। चंडीगढ़ ऐसा शहर है, जिसे स्मार्ट सिटी माना जाता है और इस शहर में पढ़े लिखे और राजनीति और देश के हर पहलू की समझ रखने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है।
बीजेपी अकाली दल गठबंधन ने पूर्ण बहुमत हासिल करते हुए 26 में से 21 सीटें अपने नाम कर कांग्रेस को करारा झटका दिया है। अभी तक चंडीगढ़ नगर निगम पर भारतीय जनता पार्टी का ही कब्जा था। मेयर और तमाम पार्षद भाजपा के ही थे।
नगर निगम चुनावों में नोट बंदी को बड़ा मुद्दा माना जा रहा था। कयास लगाए जा रहे थे कि वोटरों का एक बड़ा धड़ा कहीं ना कहीं नोटबंदी से नाराज है और शायद इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़े, पर ऐसा नहीं हुआ।
चंडीगढ़ एमसी के चुनाव नतीजों में कुछ नया नही: संजय चौहान
चंडीगढ़ एमसी चुनाव में बीजेपी की जीत कोई बड़ी उपलब्धि नही है। चंडीगढ़ में मेयर पहले से ही बीजेपी का था। ऐसे में दोबारा से बीजेपी को जीत मिलना कोई नई बात नहीं है। नगर निगम में चुनाव स्थानीय मुद्दों और मैदान में उतरे व्यक्ति विशेष की साख पर निर्भर करता है।
इन चुनाव में केंद्र सरकार के नोटबंदी का असर नहीं रहा, लेकिन आगामी होने वाले पंजाब और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इसका असर साफ देखने को मिलेगा, जिसमें जनता का रोष साफ नजर आएगा।