मेले के अगले दिन ही शूलिनी मंदिर में चोरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य स्तरीय शूलिनी मेले के समापन के एक दिन बाद ही सोलन की अधिष्ठात्री देवी मां शूलिनी की बहन दुर्गा मां के मंदिर में शातिरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया है।
दुर्गा मंदिर शूलिनी पीठ्म गंज बाजार में सोमवार देर रात चोर देवी मां के सिर पर सजे चांदी के तीन छत्र और त्रिनेत्र चुरा कर ले गए। इसमें एक नेत्र सोने का है। इसी मंदिर में शूलिनी माता मेले के दौरान अपने तीन दिन के प्रवास के दौरान रहती हैं।
चुराए सामान की कीमत करीब डेढ़ लाख आंकी जा रही है। पुलिस ने चोरी का मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
सोमवार देर रात की बताई जा रही है वारदात
पुलिस के मुताबिक चोरी सोमवार देर रात करीब दो बजे से चार बजे की बीच हुई। जिस समय वारदात हुई पुजारी का परिवार मंदिर के साथ लगते घर में सोया था। मंदिर के दो दरवाजे हैं। पहले दरवाजे के साथ लगी करीब आठ फीट ऊंची सलाखों को चोर फांदकर अंदर दाखिल हुए।
मां के मुख्यद्वार में लगे ताले को तोड़कर चोरी को अंजाम दिया। मंदिर परिसर में रात को कोई नहीं होता। मंदिर के साथ लगता पुजारी का घर है। सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे भी मंदिर में नहीं लगे हैं। चोरी का पता सुबह करीब सुबह 4.30 बजे लगा, जब मंदिर के पुजारी लक्ष्मी राम शर्मा मंदिर में पूजा के लिए पहुंचे।
उन्होंने देखा कि मंदिर के दोनों द्वार खुले हैं। वहीं ताला भी टूटा हुआ वहीं पड़ा है। जब उन्होंने मंदिर में जाकर देखा तो मंदिर से चांदी के छत्र व माता के नेत्र गायब थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने घटनास्थल का दौरा किया।
मंदिर में एक साल के भीतर दूसरी वारदात
चोरों ने पहली बार मां शूलिनी पीठम के मंदिर में चोरी नहीं की। इससे पहले मई 2013 में भी माता की पांच मूर्तियां, चांदी के छत्र, माता के नेत्र चोरी हुए थे। इनकी कीमत 2.50 लाख रुपये आंकी गई थी। इस मामले में पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से मां की मूर्तियां बरामद कर ली थीं।
वहीं, मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मंदिर में हो रही चोरियों पर पुलिस गश्त पर प्रशभन चिन्ह लग रहे हैं। पुजारी व स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले के दौरान तो मंदिर परिसर में छह से आठ पुलिस कर्मी तीन दिन तक मंदिर पर पहरा देते रहे, लेकिन मेले समापन के बाद कोई गश्त नहीं रहती। जबकि सुरक्षा के लिहाज से गंज बाजार में गश्त होनी चाहिए।
यहीं मंदिर में चढ़ावा आदि साथ साथ ही प्रशासन एकत्र करता रहता है।