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ब्रैकल मामले में शीर्ष अफसरों पर भी कसेगा शिकंजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 30 Oct 2018 12:04 PM IST
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बहुचर्चित ब्रैकल मामले में शीर्ष अफसरों पर शिकंजा कस सकता है। जांच की आंच तत्कालीन ऊर्जा सचिवों तक पहुंच सकती है। इस कंपनी की ओर से अधूरे अथवा गलत दस्तावेज पेश किए जाने के मामले में जांच बैठाई जा रही है। इसकी आंच अधिकारियों तक पहुंच सकती है।
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सरकार एक-दो दिन में विजिलेंस ब्यूरो को इस मामले में छानबीन को मंजूरी दे सकती है। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ब्रैकल कारपोरेशन को दिए गए जंगी थोपन-पोवारी प्रोजेक्ट पर एक एंगल से पहले ही जांच बैठी है।
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यह जांच अदानी कंपनी को 280 करोड़ रुपये का अपफ्रंट प्रीमियम देने के पिछली सरकार के फैसले पर बैठाई गई है। अदानी ने ब्रैकल की ओर से देय यह प्रीमियम सरकार में जमा करवाया। अदानी और ब्रैकल ने प्रोजेक्ट में साझेदारी का अपने स्तर पर समझौता किया, जिसे सरकार की मंजूरी नहीं मिली।
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विजिलेंस की एक जांच पहले से ही चल रही है। विजिलेंस ब्यूरो ने ब्रैकल को प्रोजेक्ट आवंटन मामले में भी अलग से जांच बैठानी चाही है। जांच का नया एंगल यह है कि इस कारपोरेशन ने अधूरे या गलत दस्तावेजों को पेश कर प्रोजेक्ट ले लिया। इसे अधिकारियों ने ठीक से जांचा-परखा नहीं।
एक दशक बाद भी इस परियोजना को स्थापित नहीं किया जा सका। इसी मामले में तत्कालीन सचिवों और अधिकारियों पर शिकंजा कस सकता है। राज्य सरकार के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि इस एंगल से भी जांच करने को सरकार जल्द विजिलेंस को मंजूरी दे सकती है।