प्रोस्पेक्टस घोटाला: रसीद से छेड़छाड़ करता था आरोपी, एक करोड़ का किया गबन
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इक्डोल में करीब सवा करोड़ प्रोस्पेक्टस ब्रिकी घोटाले में और खुलासे हुए हैं। पुलिस ने 2011 से लेकर 2018 तक का रिकार्ड खंगाला है। पुलिस आरोपी के साइन और प्रोस्पेक्टस बेचने के बाद बैक में जमा रकम की रसीद को फोरेंसिक लैब भेजने की तैयारी में जुट गई है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने पिछले सात साल में प्रोस्पेक्टस की सेल में इस घोटाले को अंजाम दिया था। आरोपी स्टोर से प्रोस्पेक्टस लेता था।
प्रोस्पेक्टस बेचने के बाद आरोपी बैंक में प्रोस्पेक्टस सेल राशि की तीन रसीदें बैंक में जमा करता था। बैंक में राशि जमा होने के बाद बैंक राशि की एक रसीद एचपीयू अकाउंट ब्रांच, दूसरी रसीद बैंक रिकॉर्ड जबकि तीसरी रसीद जमा करने वाले को देता था।
बैंक से रसीद मिलने के बाद आरोपी इसमें एक अंक और जोड़ देता था और इस रसीद को स्टोर में जमा कर लेता था। इस तरह से बैंक और एचपीयू के अकाउंट ब्रांच में असली प्रोस्पेक्टस राशि जमा नहीं हो रही थी। हालांकि, स्टोर के रिकॉर्ड में आरोपी प्रोस्पेक्टस की असली राशि जोड़ देता था।
अकेला था बाबू राम या और भी हैं चेहरे
पुलिस की जांच में सामने आएगा कि इस घोटाले में सिर्फ बाबू राम शामिल था या वह किसी की छत्रछाया में इतनी रकम का गबन कर गया। प्रोस्पेक्टस बिक्री की प्रक्रिया में इसकी छपाई, बिक्री से लेकर इसकी आय को बैंक में जमा करवाने तक की प्रक्रिया में कई लोग शामिल होते हैं।
2011 से लेकर 2017 तक कैसे किसी को इसकी भनक नहीं लगी। यूनिवर्सिटी का अपना लोक ऑडिट विभाग भी है, जो हर साल ऑडिट करता है। सवाल उठता है कि एलएडी की नजर में यह एक करोड़ का घोटाला क्यों सामने नहीं आया। इन सब सवालों का जवाब पुलिस जांच में सामने आएगा।