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Deoria News: आरोपियों के मोबाइल में मिले दो संदिग्ध लेनदेन

Mon, 31 Aug 2026 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Mon, 31 Aug 2026 11:48 PM IST
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Two suspicious transactions were found in the mobile phones of the accused.
देवरिया। एआर इंफ्राहाइट्स प्राइवेट लिमिटेड मेरठ के नाम से फर्जी लेटर हेड, हस्ताक्षर और ई-मेल तैयार कर 35.72 लाख रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों के मोबाइल में 25.10 लाख और 21.85 लाख रुपये के दो अन्य संदिग्ध लेनदेन मिले हैं।
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कुल 46.95 लाख रुपये के इन लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी ई-मेल आईडी, लेटर हेड और बैंक खातों की व्यवस्था कौन करता था और ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर आगे भेजी जाती थी। पुलिस की जांच में गिरोह के तार उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार से भी जुड़े होने की बात सामने आ रही है।
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रविवार को गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों विकास कुमार, शशांक कुमार साहिल और अंकुश मिश्रा से साइबर पुलिस ने पूछताछ की है। पूछताछ में सामने आया कि एआर इंफ्राहाइट्स प्राइवेट लिमिटेड मेरठ के नाम से फर्जी लेटर हेड और कूटरचित हस्ताक्षर तैयार कर बैंक को ई-मेल भेजा गया।
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इसके बाद 35,72,801 रुपये विकास कुमार के खाते में स्थानांतरित करा लिए गए। विकास ने इनमें से 34.50 लाख रुपये तनिष्क ज्वेलर्स के खाते में भेज दिए थे। पुलिस इस बात की जांच में जुटी है कि ठगों ने कितने लोगों के साथ धोखाधड़ी की है।
मुंबई क्राइम ब्रांच की साइबर सेल की जांच में पता चला था कि ठगी की रकम अलग-अलग खातों में भेजने के बाद गोरखपुर के ज्वेलरी प्रतिष्ठानों से करीब 11 करोड़ रुपये का सोना और आभूषण खरीदा गया। उस मामले में मुंबई साइबर सेल ने गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर में जांच की थी।
देवरिया और बिहार के गोपालगंज से जुड़े दो संदिग्धों के नाम भी सामने आए थे और उनकी तलाश में दबिश दी गई थी।
जांच में सामने आया था कि रकम पहले अलग-अलग खातों में भेजी जाती थी, इसके बाद ज्वेलरी प्रतिष्ठानों के बैंक खातों में भुगतान कर सोना लिया जाता था।
एआर इंफ्राहाइट्स ठगी में गिरफ्तार तीन आरोपियों के नेटवर्क और मुंबई वाले साइबर फ्रॉड के संदिग्धों के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं, अब यह भी जांच का अहम हिस्सा है। मुंबई के मामले में देवरिया और गोपालगंज से जुड़े संदिग्ध पहले ही सामने आ चुके हैं। ऐसे में रविवार को गिरफ्तार आरोपियों से मुंबई पुलिस के पूछताछ करने की संभावना भी है। साइबर पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ईमेल आईडी और लेनदेन की कड़ी जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का संचालन करने वाले मुख्य लोग कौन हैं और ठगी की रकम को सोने में बदलने तक पूरा नेटवर्क किस तरह काम करता था।

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कोट
ठगी के मास्टरमाइंड यूपी और बिहार के निवासी हैं। नाम व पते ट्रेस कर लिए गए हैं। साइबर सेल आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। गिरफ्तार लोगों ने कितने लोगों के साथ धोखाधड़ी की है, इसकी भी छानबीन चल रही है। -गौरव सिंह, सीओ साइबर क्राइम
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