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सीएम वीरभद्र बोले, राज्यपाल सुझाव दें आदेश नहीं

Thu, 05 Nov 2015 06:24 PM IST
Updated Thu, 05 Nov 2015 06:24 PM IST
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cm virbhadra singh statement on governor dev vrat.

हिमाचल में राज्यपाल देवव्रत के बैठक बुलाए जाने को लेकर मामला गरमा गया

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है। अब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्यपाल पर प्रतिक्रिया दी है। राज्यपाल की अफसरों के साथ बैठक के बाद पहली बार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। हमीरपुर सर्किट हाउस में सीएम ने कहा कि राज्यपाल अधिकारियों को आदेश देने के बजाय अपना संवैधानिक कर्तव्य निभाएं।

वे अफसरों को आदेश के बजाय प्रदेश सरकार को सुझाव दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल संस्कृत के आचार्य हैं और उन्हें संविधान का पूरा ज्ञान है। प्रदेश की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार के मामलों में हस्तक्षेप न करें। मुख्यमंत्री ने स्पोर्ट्स बिल का हवाला देते हुए कहा कि बीते सत्र से विधानसभा में इसे पास किया गया है। बिल पर साइन करने के लिए इसे राजभवन भेजा गया है।
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बिल पर साइन करें अन्यथा वापस कर दें

cm virbhadra singh statement on governor dev vrat.

सीएम ने कहा कि पूर्व में राज्यपाल कल्याण सिंह ने इस बिल पर गंभीरता नहीं दिखाई। अब नए राज्यपाल ने इस पर साइन नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल स्पोर्ट्स बिल पर हस्ताक्षर करें अन्यथा इसे वापस सरकार को लौटाएं। बैठक के सवाल पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनसे राज्यपाल ने अधिकारियों के साथ बैठक करने की बात कही थी।

उनके आग्रह पर ही अधिकारियों को भेजा गया, अन्यथा राजभवन में राज्यपाल के सचिव के अलावा कोई नहीं पहुंचता। गौरतलब है कि राज्यपाल ने हिमाचल के अफसरों की एक अहम बैठक बुलाई थी। इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई लेकिन कई ऐसे सवाल भी किए गए जिनका अफसर जवाब नहीं दे पाए थे। इसके बाद से ही राज्यपाल निशाने पर आ गए हैं।

राज्यपाल की बैठक के पक्ष में आई हिलोपा

cm virbhadra singh statement on governor dev vrat.

उधर, हिमाचल लोकहित पार्टी ने राज्यपाल की ओर से ली गई अधिकारियों की बैठक का स्वागत किया है। पार्टी के शिमला संसदीय क्षेत्र के प्रवक्ता देशबंधु सूद और राज्य कार्यकारिणी सदस्य हरीश गुलेरिया ने कहा इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ होगा कि राज्यपाल को कहीं भ्रष्टाचार की बू आ रही होगी, तभी प्रदेश के उच्च अधिकारियों की बैठक ली गई।

हिलोपा नेताओं ने कहा कि जब से पार्टी का गठन हुआ है, वह हमेशा ही जनविरोधी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। कुछ नेता सरकार में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों का असंवैधानिक तरीके से इस्तेमाल करते हैं। ऐसे नेताओं को अब आभास हो रहा है कि उनकी दुकानदारी ज्यादा दिन नहीं चलेगी। तभी राज्यपाल की बैठक का विरोध किया जा रहा है।

हिलोपा राज्यपाल की ओर से उठाए गए इस पग को संवैधानिक, प्रजातंत्र तथा लोकतंत्र के हित में उठाया गया सही कदम मानती है। राज्यपाल की ओर से उठाए गए चारों विषय प्रदेश हित में हैं। हिलोपा पूरा समर्थन राज्यपाल को समय-समय पर देती रहेगी। भ्रष्ट एवं सरकारी कामों को गलत अंजाम देने वाले अधिकारियों की जानकारी भी राज्यपाल कार्यालय को देते रहेंगे।

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