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धर्मशाला में पहली बार उपचुनाव, तीन दशक बाद बदलेगा भाजपा का चेहरा

Sun, 22 Sep 2019 11:24 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 22 Sep 2019 11:24 AM IST
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bye elections in dharamshala bjp candidates will be changed after three decades
- फोटो : अमर उजाला

विधानसभा क्षेत्र धर्मशाला में करीब तीन दशक बाद भाजपा का चेहरा बदलेगा, जबकि इस सीट पर पहली बार उपचुनाव होगा। हालांकि, साल 1985 और 1982 में प्रदेश में सरकार गिरने से दो बार मध्यवर्गी चुनाव हुए हैं। लेकिन, इस बार यह पहला मौका है, जब धर्मशाला विस क्षेत्र में उपचुनाव हो रहा है।

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धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से पांच बार जीत दर्ज कर किशन कपूर करीब दो दशकों तक विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। विस क्षेत्र में कांग्रेस की बजाय भाजपा का ही अधिक दबदबा रहा है। अब तक 11 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पांच और भाजपा प्रत्याशी छह बार जीत दर्ज करवा चुके हैं जबकि एक बार जनता पार्टी भी धर्मशाला से जीती है। 
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साल 1984 में इसलिए हुए थे मध्यवर्गी चुनाव
साल 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए आम चुनाव में कांग्रेस को केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिला। देश में कांग्रेस के पक्ष में माहौल को देखते हुए वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में विधानसभा भंग कर चुनाव करवा लिए थे। हालांकि, उस समय विधानसभा को ढाई साल बचे थे। विस चुनाव में कांग्रेस को 68 में से 58 सीटें मिली थीं। धर्मशाला से मूलराज पाधा कांग्रेस की सीट से जीते थे।

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1993 में कांग्रेस की बनी सरकार, धर्मशाला से जीते थे कपूर

वर्ष 1990 में हुए चुनाव में कांग्रेस मात्र आठ, जबकि भाजपा को 46 और उसकी गठबंधन सहयोगी जनता दल को 11 सीटें मिलीं थीं। हिमाचल में सरकार का आधा कार्यकाल ही हुआ था कि छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के कारण केंद्र की कांग्रेस सरकार ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकारों को बर्खास्त कर दिया था। करीब नौ माह के राष्ट्रपति शासन के बाद नवंबर 1993 में चुनाव हुए। इसमें कांग्रेस सत्ता में आई, लेकिन धर्मशाला से किशन कपूर भाजपा की सीट से चुनाव जीते।

अब तक धर्मशाला से ये रहे विधायक
हिमाचल के गठन से पहले जब धर्मशाला पंजाब का हिस्सा था तो 1967 में कांग्रेस के आरके चंदेल धर्मशाला से विधायक बने थे। हिमाचल गठन के बाद पहली बार 1972 में हुए चुनाव में कांग्रेस के चंद्रवर्कर विधायक बने। इसके बाद 1977 में जनता पार्टी और 1982 में बृृज लाल भाजपा से जीते।

साल 1985 में कांग्रेस के मूलराज पाधा ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1990, 1993 और 1998 तीन बार लगातार भाजपा के किशन कपूर, 2003 में कांग्रेस से चंद्रेश कुमारी, 2007 में किशन कपूर, 2012 में सुधीर शर्मा और 2017 में फिर किशन कपूर जीते।

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