Bangladesh Violence: भारतीय टेक्सटाइल उद्योग पर असर, कॉटन यार्न का निर्यात प्रभावित, आर्डरों की डिलीवरी रुकी
पंजाब से बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में कॉटन यार्न का निर्यात किया जा रहा है। बांग्लादेश के साथ रेल, सड़क संपर्क कटने के बाद उद्यमियों के माल की वहां पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है। दूसरे अब नए आर्डर भी नहीं मिल रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बांग्लादेश में तख्तापलट के बीच उपजे संकट के कारण वहां पर आम जनजीवन से लेकर उद्योग व्यापार तक सब कुछ डिस्टर्ब है। इसका सीधा असर भारत एवं बांग्लादेश के बीच होने वाले कारोबार पर भी होना तय है।
इस संकट के कारण जहां कई चुनौतियां भी हैं, वहीं संभावनाएं भी कम नहीं हैं। पंजाब से बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में कॉटन यार्न का निर्यात किया जा रहा है। बांग्लादेश के साथ रेल, सड़क संपर्क कटने के बाद उद्यमियों के माल की वहां पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है। दूसरे अब नए आर्डर भी नहीं मिल रहे हैं।
रेडिमेड गारमेंट इंडस्ट्री को उम्मीद भी
दूसरी तरफ रेडिमेड गारमेंट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि अब विदेशी बायर्स बांग्लादेश के बजाय भारत का रुख करेंगे। इसके अलावा बांग्लादेश में 25 फीसदी टेक्सटाइल उद्यमी भारतीय हैं, मौजूदा हालात में वे भी वहां से अपना कामकाज बंद करके भारत में अपनी इकाइयां स्थापित कर सकते हैं। साफ है कि इन परिस्थितियों में यहां के टेक्सटाइल उद्योग को पंख लग सकते हैं।
अमेरिका के बाद बांग्लादेश से कारोबार सरप्लस
आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के बाद बांग्लादेश से भारत का कारोबार सरप्लस में है। भारत एवं बांग्लादेश के बीच कुल 14 बिलियन डाॅलर का कारोबार होता है। इसमें से भारत बांग्लादेश को 12 बिलियन डॉलर का माल निर्यात करता है, जबकि वहां से सिर्फ दो बिलियन डाॅलर का ही आयात होता है, लेकिन अब वहां पर हालात खराब होने से दोनों देशों के बीच आपसी कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
नार्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के प्रधान संजय गर्ग का कहना है कि बांग्लादेश संकट के कारण कॉटन यार्न का निर्यात प्रभावित हो रहा है। नए ऑर्डर नहीं आ रहे और पुराने ऑर्डर के माल की डिलीवरी नहीं हो रही। ऐसे में उद्यमी हालात सही होने का इंतजार कर रहे हैं। इसमें लंबा वक्त भी लग सकता है।
अपैरल निटवियर गारमेंट्स एक्सपोर्टर्स आर्गेनाइजेशन के प्रधान हरीश दुआ का कहना है कि बांग्लादेश से मासिक अपैरल एवं टेक्सटाइल निर्यात तीस हजार करोड़ रुपये का है, जबकि भारत से यह साढ़े बारह हजार करोड़ रुपये मासिक का है। अब भारत से निर्यात बढ़ सकता है। विदेशी बायर्स यहां का रुख कर सकते हैं। इसका स्पष्ट संकेत शेयर बाजार में भी मिला है। बांग्लादेश में संकट के बाद से भारतीय शेयर बाजार में देश की गारमेंट एवं अपैरल कंपनियों के शेयरों में बीस फीसदी तक का उछाल देखा गया है।
फेडरेशन आफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल आर्गेनाइजेशन में टेक्सटाइल डिवीजन के हेड अजीत लाकड़ा कहते हैं कि बांग्लादेश से अमेरिका एवं यूरोप के देशों में निर्यात ड्यूटी फ्री है, जबकि भारत से इन देशों को निर्यात करने पर पंद्रह फीसदी ड्यूटी लगती है। ऐसे में अब प्रीमियम क्वालिटी के माल में भारत की हिस्सेदारी विश्व बाजार में बढ़ सकती है। विदेशी बायर्स भी अब भारत से माल लेंगे।