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जालंधर में गरमाई राजनीति: AAP नेता लक्की ओबरॉय की हत्या, विधायक कोटली और पुलिस कमिश्नर आमने-सामने

Fri, 06 Feb 2026 09:41 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर Published by: अंकेश ठाकुर Updated Fri, 06 Feb 2026 09:41 PM IST
सार

आप नेता लक्की ओबरॉय की हत्या मामले में राजनीतिक नेता और पुलिस प्रशासनिक अधिकारी आमने-सामने हो गए हैं। कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह कोटली और पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर के बीच तीखा टकराव हुआ, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया।

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AAP leader Lucky Oberoi murder case led to confrontation between MLA Kotli and Police Commissioner
जालंधर में आप नेता लक्की ओबरॉय की हत्या। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जालंधर में आम आदमी पार्टी के नेता लक्की ओबरॉय की दिनदहाड़े हत्या के बाद जालंधर की राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के जालंधर दौरे के दौरान कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह कोटली और पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर के बीच तीखा टकराव हुआ, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया।

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पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। इसी दौरान विधायक सुखविंदर सिंह कोटली ने आरोप लगाया कि पुलिस कमिश्नर का रवैया ठीक नहीं है और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, इसी बात को लेकर मौके पर ही विधायक और पुलिस कमिश्नर के बीच तीखी बहस हो गई, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।
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विधायक कोटली ने कहा कि लक्की ओबरॉय को पहले से धमकियां मिल रही थीं और इसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी, बावजूद इसके उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे।
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वहीं पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी भी राजनीतिक दबाव में काम नहीं करती। उन्होंने कहा कि हत्या मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं, जबकि पुलिस इसे जांच में राजनीतिक दखल के रूप में देख रही है। इससे प्रशासन और विपक्ष के बीच टकराव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

आप सरकार जिम्मेदारी से नहीं बच सकती- अंगद दत्ता

जालंधर में लक्की ओबरॉय की दिनदहाड़े हुई नृशंस हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पंजाब में बिगड़ती कानून व्यवस्था और आप सरकार की प्रशासनिक विफलता का सबसे भयावह परिणाम है। यह कहना है पंजाब यूथ कांग्रेस के सचिव अंगद दत्ता का, जिन्होंने इस हत्या के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
 
अंगद दत्ता ने कहा कि यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके संकेत पहले ही मिल चुके थे। यदि समय रहते प्रशासन ने चेतावनियों को गंभीरता से लिया होता, तो इस हत्या को रोका जा सकता था।

पहले ही दी गई थी लिखित चेतावनी, प्रशासन रहा मौन

अंगद दत्ता ने खुलासा किया कि उन्होंने 22 दिसंबर 2025 को उपायुक्त जालंधर को लिखित रूप में आगाह किया था। पत्र में शहर में तेजी से बढ़ रही अवैध ‘प्रेसिडेंटशिप संस्कृति’, हथियारबंद युवाओं के गिरोह और समानांतर सत्ता केंद्रों के सक्रिय होने की जानकारी दी गई थी। साथ ही तत्काल कानूनी और निवारक कार्रवाई की मांग भी की गई थी। दत्ता ने कहा, कि मैंने साफ तौर पर चेताया था कि यदि इन अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगी, तो जालंधर हिंसक टकराव की ओर बढ़ेगा। प्रशासन ने उस चेतावनी को नजरअंदाज किया और आज उसके गंभीर परिणाम सामने हैं।

सरकार की निष्क्रियता ने बनाया अपराध का माहौल

यूथ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि आप सरकार कानून का सख्ती से पालन कराने, युवाओं के अपराधीकरण पर रोक लगाने और गैरकानूनी सत्ता ढांचों को खत्म करने में पूरी तरह विफल रही है। इसी लापरवाही ने ऐसा माहौल तैयार किया, जिसमें लक्की ओबरॉय ती हत्या संभव हो सकी। जब अवैध ताकतों को खुलेआम काम करने दिया जाए, जब चेतावनियों को अनसुना किया जाए और जब निवारक पुलिस व्यवस्था ध्वस्त हो जाए, तो सरकार अपनी लापरवाही के कारण इस तरह के अपराधों की सहभागी बन जाती है।

खून बहने के बाद जागती है सरकार

अंगद दत्ता ने कहा कि आप सरकार ने खूनखराबे के बाद बयान देने की आदत डाल ली है, लेकिन हिंसा रोकने की जिम्मेदारी से उसने मुंह मोड़ लिया है। कानून व्यवस्था का मतलब हत्या के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करना नहीं, बल्कि हत्या होने से पहले उसे रोकना है। इस कसौटी पर आप सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।

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