पौष पूर्णिमा के पावन पर्व पर जहां गंगा स्नान के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। पौषी पूर्णिमा आज पूरे में स्नान-दान के साथ मनाई गई। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर द्वारा कालिका गली में संचालित अन्नक्षेत्र में वैदिक ब्राह्मणों एवं बटुकों को भोजन प्रसाद ग्रहण कराया गया। दक्षिणा के उपरांत कंबल का भी वितरण किया गया।
वाराणसीः पौष पूर्णिमा पर लाखों लोगों पतितपावनी गंगा किया स्नान-ध्यान
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ज्ञातव्य है कि प्रत्येक पूर्णिमा पर काशी विश्वनाथ मंदिर अन्नक्षेत्र द्वारा बटुक ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा प्रदान की जाती रही है। इसी क्रम में आज भोजन प्रसाद वितरण के उपरांत दक्षिणा के साथ कंबल का भी वितरण किया गया।
लगभग 1100 के आसपास बटुक ब्राह्मणों ने भोजन ग्रहण किया। कंबल वितरण में उत्तर प्रदेश के धर्मार्थ राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी के प्रतिनिधि आलोक श्रीवास्तव, भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष विद्यासागर राय,आचार्य पवन शुक्ला,हरी केसरी,नलिन नयन मिश्र,अपर कार्यपालक अधिकारी निखिलेश मिश्र,महावीर सिंह आदि लोग उपस्थित थे।
पौष पूर्णिमा को देश के कुछ हिस्सों में शांकंभरी पूर्णिमा भी कहते हैं। पौष पूर्णिमा को हिन्दू कैलेंडर में सबसे पवित्र दिनों में से एक माना जाता है। यह दिन हिन्दू कैलेंडर के पौष मास की पूर्णिमा तिथि को आता है। पौषी पूर्णिमा के मौके हजारों श्रद्धालु गंगा नदी में डुबकी लगाई।
माघ महीने में कल्पवास और संगम स्नान का विशेष महत्व है। इस पवित्र महीने की शुरुआत हमेशा भगवान वेणी माधव को प्रणाम कर की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान वेणी माधव के आशीर्वाद से सभी देवी देवताओं का आशीष मिलता है।
महंतों ने बताया कि जब ब्रह्मा जी ने प्रयाग में यज्ञ करने का संकल्प लिया था तो भगवान नारायण से यज्ञ की रक्षा के लिए कहा। भगवान ने कहा कि वो खुद यज्ञ की रक्षा करेंगे। देवी देवताओं ने सवाल किया कि अकेले कितने रूपों में यज्ञ की रक्षा करेंगे तो भगवान नारायण ने कहा वे द्वादश रूप में आएंगे।
यही कारण है कि भगवान यहां द्वादश माधव के रूप में विद्यमान हैं। मान्यता है कि यहां प्रणाम करने से दुनिया के सभी देवी देवता आशीष देते हैं। माघ महीने में स्नान का पूरा पुण्य मंदिर दर्शन के बाद ही मिलता है।