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मुंशी प्रेमचंद की जयंती कलः वाराणसी में लमही स्थित स्मारक और पुश्तैनी मकान बदहाल, 17 साल से केवल घोषणाओं की घुट्टी

Fri, 30 Jul 2021 01:51 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 30 Jul 2021 01:51 PM IST
सार

हिंदी साहित्य जगत के दैदीप्यमान नक्षत्र कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद को अपनी ही जमीन पर जमीन नहीं मिल सकी। मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही भले ही कहानियों में बहुत सुंदर नजर आता है, लेकिन पिछले 17 साल से घोषणाओं की घुट्टी के भरोसे ही आगे बढ़ रहा है।

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Munshi Premchand birth anniversary monument and ancestral house at Lamhi in Varanasi are in bad condition only announcements from 17 years
मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही - फोटो : अमर उजाला

हिंदी साहित्य जगत के दैदीप्यमान नक्षत्र कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद को अपनी ही जमीन पर जमीन नहीं मिल सकी। मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही भले ही कहानियों में बहुत सुंदर नजर आता है, लेकिन पिछले 17 साल से घोषणाओं की घुट्टी के भरोसे ही आगे बढ़ रहा है। हालत यह है कि राष्ट्रीय स्मारक घोषित होने के 17 साल बाद इसकी डीपीआर तैयार हुई और बजट जारी किया गया। इसके कारण आज तक मुंशी प्रेमचंद का स्मारक और पुश्तैनी मकान बदहाल ही है। वहीं लमही महोत्सव भी बस सरकारी आयोजन बनकर रह गया है।



मुंशी प्रेमचंद के परिवार से जुड़े रिश्ते में प्रपौत्र दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि 2005 में मुंशी प्रेमचंद की 125वीं जयंती पर संस्कृति मंत्री जयपाल रेड्डी ने मुंशी प्रेमचंद के आवास को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया था। उसी समय तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने मकान और स्मारक के लिए 25 लाख रुपये की धनराशि आवंटित करने की घोषणा की थी।

इसके साथ ही संस्कृति मंत्री ने शोध संस्थान के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये भी दिए थे। इसके बाद 2011 में मुंशी जी की जन्मस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में घोषित करने की बात हुई लेकिन प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव नहीं भेजा। 

Munshi Premchand birth anniversary monument and ancestral house at Lamhi in Varanasi are in bad condition only announcements from 17 years
लमही स्थित स्मारक - फोटो : अमर उजाला
2016 में इसे हेरिटेज विलेज बनाने की घोषणा की गई। हालत यह है कि न तो पुश्तैनी मकान का अपना बिजली कनेक्शन है और ना ही रखरखाव का कोई इंतजाम। आए दिन मुंशीजी के मकान से कभी पंखा चोरी हो जाता है तो कभी तार। वहीं 2018 में भी आभासी म्यूजियम बनाने की घोषणा की गई थी लेकिन 13 साल बीतने के बाद भी आज तक जमीन पर कुछ नहीं उतर सका है। अभी प्रशासन ने राष्ट्रीय स्मारक के लिए 25 लाख रुपये की पहली किश्त जारी की है।

पुश्तैनी मकान से पंखे गायब

Munshi Premchand birth anniversary monument and ancestral house at Lamhi in Varanasi are in bad condition only announcements from 17 years
पुश्तैनी मकान से गायब है पंखे - फोटो : अमर उजाला
पुश्तैनी मकान में संस्कृति विभाग की ओर से लाइट एंड साउंड सिस्टम शो चलाने का प्रस्ताव था, लेकिन 2018 में हुए आयोजन के बाद किसी ने दोबारा इसको देखा तक नहीं। स्मारक स्थल की देखरेख करने वाले सुरेश चंद्र दुबे ने बताया कि बहुत जोरशोर से इसकी शुरुआत की गई लेकिन वर्तमान में इसके बारे में किसी को पता तक नहीं है। वहीं स्मारक स्थल पर चलने वाले पुस्तकालय की भी हालत बहुत अच्छी नहीं है। पुस्तकालय में न तो किताबें हैं और स्मारक स्थल पर पर्यटकों के लिए सुविधाएं। देख-रेख के अभाव में कई पंखे गायब हो गए। 
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सड़क बदहाल, मुंशी जी की प्रतिमा पर गिरता है गंदा पानी

Munshi Premchand birth anniversary monument and ancestral house at Lamhi in Varanasi are in bad condition only announcements from 17 years
मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही में बना प्रवेश द्वार - फोटो : अमर उजाला
पांडेयपुर से लमही जाने वाली सड़क भी बदहाल हो चुकी है। वहीं पांडेयपुर फ्लाईओवर के नीचे बनी मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर बरसात के दौरान पुल से रिसने वाला गंदा पानी गिरता है। इससे प्रतिमा का सफेद रंग भी अब बदरंग हो चुका है। प्रतिमा को देखकर ऐसा लगता है कि लंबे समय से उसकी सफाई तक नहीं की गई है। प्रतिमास्थल पर भी गंदगी बिखरी हुई है।
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खानापूर्ति बन गया लमही महोत्सव

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मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही - फोटो : अमर उजाला
दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने 1978 से जयंती समारोह मनाने की शुरुआत की। इसके  बाद 2008 में लमही महोत्सव शुरू हुआ। इसके बाद 2009 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने 20 हजार रुपये दिए थे। इसमें हमने राहत इंदौरी, वसीम बरेलवी जैसे नामचीन शायरों को आमंत्रित किया था और वह मुंशी जी के नाम पर आए थे। 2010 से यह महोत्सव तीन दिवसीय हुआ।
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