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Mahashivratri Special: काशी में विराजमान हैं पाकिस्तानी महादेव, जानिए कैसे पड़ा ये नाम?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 13 Feb 2018 03:44 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
कण-कण शंकर की मान्यता वाली काशीपुराधिपति की नगरी काशी में शिव कई स्वरूपों में विराजमान हैं। भगवान विश्वेश्वर स्वयंभू ज्योर्तिलिंग के रूप में विराजते हैं। शिव की नगरी काशी में भोलेनाथ का मंदिर पाकिस्तानी महादेव के नाम से भी जाना जाता है। यह शिवलिंग अपने आप में आजादी के बाद हुए विभाजन की दास्तान संजोए हुए है। आगे की स्लाइड्स में जानिए...
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गायघाट के समीप शीतला घाट स्थित पाकिस्तानी महादेव का शिवलिंग स्थापित है। स्थानीय लोग इन्हें पाकिस्तानी महादेव के नाम से ही जानते हैं।
पूर्व क्षेत्रीय पार्षद घनश्याम सिंह ने बताया कि बंटवारे का दंश आज भी भारत और पकिस्तान के आम नागरिक झेल रहे हैं।
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इसी बंटवारे का दंश झेलते हुए भगवान् शंकर का यह अनोखा शिवलिंग भी पकिस्तान से हिन्दुतान में उनकी सबसे प्रिय नगरी काशी पहुंचा। जब देश का बंटवारा हुआ तो लाहौर में रहने वाले पूर्वी बंगाल के सीताराम मोहानी काशी पहुंचे थे। उनके पास एक शिवलिंग था जिसे वो गंगा में प्रवाहित करना चाहते थे। जिसे नाविकों ने देखा और उन्हें शिवलिंग प्रवाहित करने से रोक दिया।
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नाविकों के रोकने पर सीताराम ने उसे यहीं स्थापित करवा दिया और उसके बाद उनके रिश्तेदार यमुना दास जो इस घाट पर ऊपर रहते थे उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया। जो आज भी पाकिस्तानी शिव मंदिर के नाम से प्रसिद्द है। क्षेत्रीय पार्षद और मंदिर के संयोजक अजीत ने बताया कि यह बात सिर्फ कहावत नहीं है।
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इस मंदिर का नाम नगर निगम के साथ साथ विकास प्राधिकरण में भी पाकिस्तानी महादेव के नाम से ही दर्ज है। यह मंदिर आज़ादी के समय का है और यह शिवलिंग पकिस्तान के लाहौर शहर से यहां आया है। इसमें भी भगवान का वास है इसलिए ये हमारे लिए पूज्य है।