भैरव अष्टमी पर बुधवार को काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का भक्तों ने धूमधाम से वार्षिक जन्मोत्सव मनाया। पंचमेवा और फलों से निर्मित 801 किलो का केक काटा गया। मंदिर को गुब्बारे, फूलों और रुद्राक्ष से सजाया गया। बटुक भैरव, लाट भैरव, भूत भैरव, क्रोधन भैरव सहित अन्य भैरव मंदिरों में बाबा का श्रृंगार पूजन कर जन्मोत्सव मनाया गया। काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटी। देर रात तक दर्शन का क्रम अनवरत जारी रहा।
शाम में कालभैरव मंदिर में 801 किलो का केक काट कर बाबा का जन्मोत्सव मनाया गया और भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में केक का वितरण किया गया। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हर साल कालभैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान काल भैरव का अवतरण हुआ था।
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केक काटकर मनाया काशी के कोतवाल का जन्मोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि भैरव को प्रसन्न किए बिना भगवान शिव की भक्ति नहीं होती है। काशी में रहने के लिए कोतवाल कालभैरव से इजाजत लेना है। भगवान श्रीकृष्ण ने पांडु पुत्र भीम को इंद्रप्रस्थ की रक्षा के लिए यहां तपस्या के लिए भेजा था। बाबा बटुकनाथ के प्रताप से इंद्रप्रस्थ की रक्षा हुई।
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काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव
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बड़ी पियरी चौखंडीवीर स्थित बाबा काल भैरव मंदिर में दिन भर भक्तों की कतार लगी रही। महंत राजेश्वरानंद ने श्रृंगार करने के बाद बाबा को नूतन वस्त्र धारण कराया। उन्हें भोग लगाया। दरअसल, भैरव अष्टमी से एक दिन पहले काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव शहर का जायजा लेने के लिए निकलते हैं। बाबा की शाही सवारी तय रास्तों से होते हुए वापस पियरी स्थित मंदिर पहुंचती है।
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बटुक भैरव मंदिर में श्रृंगार
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भैरवाष्टमी पर प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त पांच वैदिक ब्राह्मणों द्वारा बाबा का षोडशोपचार पूजन किया गया। मध्यान्ह 12 बजे विशेष श्रृंगार दर्शन, झांकी सायंकाल 5 बजे, अष्ट भैरव हवन सायंकाल 7 बजे, श्रीकालभैरव जन्म लीला, कृष्ण-सुदामा लीला, महिषासुर वध, काली तांडव, मसान की होली, शीतला झांकी इत्यादि कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।
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बटुक भैरव मन्दिर
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कमच्छा स्थित प्राचीन बटुक भैरव मन्दिर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी शुक्रवार को भैरव अष्टमी के अवसर पर कमच्छा स्थित बाबा बटुक भैरव जी का भव्य रुद्राक्ष श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर दिव्य झांकी का नयनाभिराम दर्शन हजारों श्रद्धालुओं ने किया।