भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार को निधन हो गया था। उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने यह जानकारी दी थी। दिल्ली कैंट स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा था। अस्पताल की तरफ से बताया गया था कि फेफड़ों में संक्रमण की वजह से वह सेप्टिक शॉक में थे। मुखर्जी के निधन पर भारत सरकार ने 31 अगस्त से छह सितंबर तक सात दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से भी प्रणब दा काफी लगाव रहा है। वह दो बार आ चुके हैं।
2 of 7
pranab mukherjee bhu
- फोटो : pranab mukherjee bhu
बीएचयू के शताब्दी वर्ष समारोह में 12 मई 2016 को जब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को तत्कालीन कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी उनसे आने का अनुरोध किया था। इस पर न केवल उन्होंने आने की स्वीकृति दी बल्कि रात्रिभोज के लिए जब राष्ट्रपति भवन के एक अधिकारी ने मेहमानों की संख्या कम रखने की बात कुलपति से कही। तभी प्रणब दा ने तुरंत रोकते हुए कहा कि मेहमानों की संख्या कुलपति पर छोड़ दीजिए।
महामना की बगिया में भारत रत्न प्रणब मुखर्जी दो बार आ चुके हैं। 2016 के पहले वह 25 दिसंबर 2012 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की 150वीं जयंती के स्मरणोत्सव कार्यक्रम के समापन समारोह और विशेष दीक्षांत समारोह में भी बीएचयू आ चुके हैं। दोनों कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी को सुनने के लिए स्वतंत्रता भवन का पूरा सभागार दर्शकों से भरा रहा।
दिसंबर 2012 में बीएचयू में दीक्षांत समारोह में आए प्रणब मुखर्जी के कार्यक्रम में नेपाल के तत्कालीन राष्ट्रपति राम बरन यादव, यूपी के तत्कालीन राज्यपाल डॉ बीएल जोशी बीएचयू के तत्कालीन चांसलर डॉ कर्ण सिंह सहित कई लोग शामिल हुए थे। बीएचयू में एलडी गेस्ट हाउस में विश्राम भी किया था।
मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र का किया था शिलान्यास
25 दिसंबर 2012 को महामना की 150वीं जयंती के स्मरणोत्सव कार्यक्रम के समापन और विशेष दीक्षांत समारोह में आए प्रणब दा ने मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र का शिलान्यास किया था। उस समय उनके साथ तत्कालीन कुलपति प्रो लाल जी सिंह, नेपाल के तत्कालीन राष्ट्रपति रामबरन यादव सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।