वक्री चल रहे शनि की दृष्टि मौजूदा समय सबसे भयानक और दुखदायी स्थिति में है। सबसे क्रूर माने जाने वाले इस ग्रह के कुंडली में बैठने से परेशान जातकों के लिए खुशखबरी है। आगे की स्लाइड्स में जानें..
25 मई गुरुवार को शनि जयंती पर सविधि पूजा और उपायों से प्रसन्न किया जा सकता है। उस दिन शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती, महादशा, अंतरदशा के अशुभ फलों में कमी और दृष्टि में बदलाव का महायोग मिलेगा। खास बात यह है कि उस दिन चार ग्रहों की युति शनि की क्रूरता में कमी लाते हुए उसकी दृष्टि को शुभ फलदायी बना रही है।
ऐसे में मुक्तिदायिनी काशी में शनि की विशेष आराधना दुखों-संघर्षों से उबारने के लिए कारगर साबित हो सकती है। जयंती वाले दिन गुरु के प्रभाव से बली शनि की दृष्टि छठवें भाव पर पड़ने पर अशुभ फलों को नष्ट करके शुभता की वृद्धि करेगी। उस दिन शनि की दृष्टि जिस भाव पर भी होगी, वहां बृहस्पति की दृष्टि के साथ शुक्र, बुध, सूर्य की दृष्टि पड़ने से अशुभ फलों में कमी आएगी।
शुभ ग्रहों की दृष्टि शनि की दृष्टि से उस स्थान की रक्षा करेगी। इसके साथ ही सूर्य, शुक्र, गुरु और मंगल का एक साथ होना शनि की 10 प्रकार की दशाओं से मुक्ति दिलाने में मदद करेगा। शनि के साधक कन्हैया स्वामी बताते हैं कि जयंती के दिन शनि की यथाशक्ति पूजा करने से संघर्षों, कष्टों से छुटकारा मिलने का योग है। उस दिन थोड़े से उपायों से भी शनि को प्रसन्न किया जा सकता है।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार धनु, मकर, वृश्चिक राशि के जातकों पर शनि की साढ़े साती, वृष, कन्या राशि वालों पर ढैय्या चल रही है। ऐसे जातकों को जयंती के जिन शनि मंदिर में दीपदान, उपवास करना चाहिए। महावीर पंचांग के संपादक डॉ. रामेश्वर नाथ ओझा का कहना है कि शनि जयंती के दिन शनि ग्रह से आक्रांत जातक यदि शनि की अपेक्षित विधि से तैलाभिषेक, छायादान और पूजन करते हैं तो निश्चय ही कष्टों से छुटकारा मिलेगा।