वाराणसी के लोहता थाना रहीमपुर नई बस्ती मोहल्ले में रविवार सुबह बड़े भाई ने अपने छोटे भाई और उसकी पत्नी की हथौड़े से वारकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बड़ा भाई और उसकी पत्नी घर से भाग निकले। रोज के घरेलू झगडे़ और आपसी रंजिश में हुई हत्या की सूचना पाकर मौके पर पहुंची लोहता पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य इकट्ठा किए। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण और सीओ सदर ने भी घटनास्थल का जायजा लिया और हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीमें गठित कीं। मां जुलेखा की तहरीर पर आरोपी बेटे और बहू के खिलाफ पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, भदोही के स्वर्गीय महबूब अली का परिवार छह-सात साल पूर्व लोहता के नई बस्ती में आकर बस गया था। महबूब अली के पांच पुत्र हैं। एक दुबई में रहता है, चार रहीमपुर में रहते हैं। बेटों में तीसरे नंबर का नियाज भदोही में एक वारदात के बाद से जेल में निरुद्ध है। घर में बड़ा भाई निजामुद्दीन, छोटा भाई निसार व नसीर रहते हैं। देखें अगली स्लाइड्स...
घर में निजामुद्दीन और निसार के बीच कई माह से मनमुटाव चल रहा था। सुबह नौ बजे निजामुद्दीन उर्फ मुन्ना की सात वर्षीय बेटी शाइस्ता खाना मांग रही थी तो निसार उर्फ सीपू(35) की पत्नी खुशबू(30) ने थाली में खाना लाकर परोस दिया। जबकि दोनों भाइयों का किचन (रसोईघर) अलग-अलग है। यह देखते ही नियाजुद्दीन और उसकी पत्नी शहजादी ने खुशबू का विरोध किया कि तुमने मेरी बेटी को क्यों खाना दिया।
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लोहता थाना क्षेत्र के रहीमपुर नई बस्ती में पति-पत्नी की हत्या
- फोटो : अमर उजाला
इसी बात पर दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ तो तब तक निसार बीच में पड़कर समझाने का प्रयास करने लगा। दोनों का विवाद छत पर हो रहा था। तभी एक धारदार रॉड से निजामुद्दीन ने निसार के गर्दन पर वार कर दिया और पास में रखे हथौड़े से सिर पर वार किया। पति को बचाने आगे आई खुशबू को भी गुस्से में निजामुद्दीन ने हथौड़े से सिर पर वारकर लहूलुहान कर दिया। चीख पुकार सुनकर पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे और खून से लथपथ दंपती को बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर भिजवाया, जहां रास्ते में ही दोनों ने दम तोड़ दिया।
घटना को अंजाम देने के बाद निजामुद्दीन और उसकी पत्नी शहजादी मौके से फरार हो गए। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अमित कुमार ने बताया कि बड़े भाई और उसकी पत्नी शहजादी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित की गई हैं।
रोटी के एक टुकड़े ने ले ली दो जान
पड़ोसियों के अनुसार निजामुद्दीन के परिवार से मोहल्ले में किसी से बनती नहीं थी। हालांकि पावरलूम का काम करने वाले निसार उर्फ सीपू मिलनसार और दूसरों की सहायता के लिए हमेशा प्रयासरत रहता था। भाइयों में विवाद था लेकिन उनके बच्चों के लिए निसार और उसकी पत्नी खुशबू कभी रंज और गम नहीं रखते थे। जब निजामुद्दीन की बेटी शाइस्ता खाना के लिए रो रही थी तो खुशबू को देखा नहीं गया, उसने रोटी और सब्जी थाली में परोस दी। बिलखते हुए मां जुलेखा यही कह रही थी कि रोटी के टुकड़े के लिए भाई-भाई का हत्यारा बन गया। निजाम और उसकी पत्नी शहजादी ने बहुत बड़ा गुनाह किया। निसार और खुशबू की दो संतान फैजान चार साल और तीन माह की आफसा की परवरिश कौन करेगा। यही कहते हुए जुलेखा बेसुध हो जा रही थी। वहीं खुशबू के मायके से भी परिजन पहुंच चुके थे।