कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन की गिरफ्तारी को लेकर प्रशासन पूरी तरह लामबंद है। इसे लेकर पुलिस ने शनिवार को विधायक की गिरफ्तारी के लिए उनके घर पहुंचकर दबिश दी। विधायक के घर दबिश डालने से पहले प्रशासन ने पूरा होमवर्क किया। मामला माननीय से जुड़ा था। जिला प्रशासन को ये भी डर था कि मामला कहीं राजनीतिक तूल पकड़ जाने के साथ ही कहीं माहौल न बिगड़ जाए।
कैराना विधायक नाहिद हसन के घर पुलिस की दबिश, लटकी गिरफ्तारी की तलवार
नौ सितंबर को कैराना में संदिग्ध गाड़ी के कागजात दिखाने को लेकर विधायक और एसडीएम के बीच हुई बहस के बाद ये मसला शुरू हुआ था। वीडियो वायरल हुई। पुलिस ने विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया, पहले 24, फिर 72 घंटे का समय देने के बाद भी विधायक पक्ष द्वारा संदिग्ध गाड़ी और उसके कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए, तो पुलिस को भी लगने लगा था कि गाड़ी सही होती तो कागजात आने में इतनी देर नहीं लगती।
इसी बीच विधायक पक्ष ने 16 सितंबर को कैराना तहसील में एक लाख लोगों के साथ धरने प्रदर्शन की अनुमति मांगकर पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि पुलिस प्रशासन ने धरने की अनुमति नहीं दी। भाकियू सुप्रीमो नरेश टिकैत के पास पूर्व सांसद तबस्सुम हसन समर्थन मांगने के लिए पहुंची।
टिकैत की मध्यस्थता के बाद पुलिस प्रशासन ने विधायक को पांच दिन का वक्त और दे दिया, लेकिन पुलिस को ये अंदेशा हो चुका था कि गाड़ी और कागज आने वाले नहीं है। लिहाजा पुलिस ने विधायक के खिलाफ घेराबंदी शुरू कर दी थी।
उधर, कानूनी एक्सपर्ट की मदद से पुलिस ने विधायक के खिलाफ वारंट लेने को मजबूत तथ्यों के साथ कोर्ट के लिए फाइल तैयार की गई। इसी प्लानिंग का नतीजा हुुआ कि पुलिस विधायक के खिलाफ वारंट लेने में कामयाब रही।
थानों में खंगाला सपा विधायक का काला चिट्ठा
विधायक के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों का चिट्ठा पुलिस ने खंगाला। एसपी के मुताबिक विधायक पर संगीन धाराओं में 11 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें जानलेवा हमले सहित धोखाधड़ी के मामले हैं।
इन मामलों में कहीं उन्हें आसानी से जमानत ना मिल जाए, इसलिए पुलिस ने झिंझाना में दर्ज एसडीओ पर हमले के मामले में आईपीसी की धारा 333 बढ़ा दी। इसमें 10 साल तक की सजा संभव है। पुलिस ने कैराना विधायक नाहिद हसन का पूरा चिट्ठा तैयार कर कई कानूनी एक्सपर्ट से सलाह ली।
मामला राजनीतिक था। लिहाजा डीआईजी से लेकर डीजीपी तक पूरे मामले की रिपोर्टिंग हुई। पूरी अपडेट वहां से दी जाती रही। इस दौरान पुलिस की टीमें कैराना कस्बे की गतिविधियों पर नजर रखती रही।
पुलिस के हालचाल दस्ते ने कसबे के लोगों को विश्वास में लिया। इसी प्लानिंग के तहत 15 सितंबर को ही कैराना में पांच कंपनी पीएसी, आरआरएफ बुलाकर तैनात कर दी गई, ताकि लोगों में सुरक्षा की भावना बनी रहे।