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भावुक तस्वीरें: पति का चेहरा देख बेहोश होकर गिरी पत्नी, सदमे में मां, ढाई साल के मासूम ने दी मुखाग्नि

Thu, 22 Sep 2022 08:54 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 22 Sep 2022 08:54 PM IST
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SSB jawan was cremated in a gloomy atmosphere in Saharanpur see photos
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार। - फोटो : amar ujala

सहारनपुर जनपद में छुटमलपुर क्षेत्र के गांव रामखेड़ी निवासी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान अनुज का पार्थिव शरीर गुरुवार को पहुंचा। वहीं दोपहर बाद भारत माता की जय, अमर शहीद अनुज अमर रहे के गगनभेदी नारों के बीच राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि जवान के ढाई साल के बेटे अक्षित ने दी। 


 
बता दें कि एसएसबी जवान अनुज की मंगलवार की देर रात श्रीनगर के पंड्रेथन इलाके में इमारत से गिरने पर मौत हो गई थी। गुरुवार की सुबह उनका पार्थिव शरीर एसएसबी के जवान और अधिकारी ट्रक से लेकर गांव रामखेड़ी पहुंचे। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर जवान को अपनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को जवान के घर ले जाया गया तो परिजनों में कोहराम मच गया। 

SSB jawan was cremated in a gloomy atmosphere in Saharanpur see photos
विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala

यहां पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा और भाजपा नेता साहब सिंह पुंडीर ने अर्थी को कांधा दिया। यहां से शवयात्रा गगनभेदी नारों के बीच जवान की समाधि बनाने के लिए चिह्नित किए गए स्थल पर पहुंची। जहां राजकीय सम्मान के साथ अनुज के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। एसएसबी के जवानों और पुलिस लाइन से आई गारद ने सलामी दी। 

SSB jawan was cremated in a gloomy atmosphere in Saharanpur see photos
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार। - फोटो : amar ujala

ढाई साल के अक्षित ने दी मुखाग्नि तो सभी की आंखें हुईं नम
जवान अनुज के ढाई साल के मासूम बेटे अक्षित ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी तो एकबारगी सभी की आंखें नम हो गईं। वह अपने चाचा अजय की गोद में था। अक्षित हजारों की भीड़ में पिता की इस हालत को देख गुमसुम था।

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अंतिम यात्रा। - फोटो : amar ujala
वहीं पांच साल की बेटी आरोही भी समझ नहीं पा रही थी कि पिता को क्या हो गया है। इतने सारे लोग घर पर क्यों इकट्ठा हुए हैं। इससे पहले जब जवान का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो पत्नी शिखा पछाड़ खा कर गिर पड़ी। परिजन महिलाओं ने उसे बड़ी मुश्किल से संभाला। मां का भी रो रो कर बुरा हाल था। वह बार-बार अपने लाड़ले को उठ बैठने को कह रही थी। 
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चंद्रशेखर भी पहुंचे। - फोटो : amar ujala

शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर की नारेबाजी
गांव पहुंचने पर पार्थिव शरीर वाले ट्रक को रोक कर भीम आर्मी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अनुज को शहीद का दर्जा, पत्नी को नौकरी, पचास लाख की सहायता, पेंशन और गांव में अनुज के नाम पर मुख्य द्वार बनवाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। 

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