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दमोह: जन्मदिन की पार्टी नहीं दी तो भेजा 41,250 का नोटिस! दोस्तों की अनोखी तकरार पहुंची कानून की चौखट तक

Wed, 02 Sep 2026 09:29 AM IST
दमोह ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Wed, 02 Sep 2026 09:29 AM IST
सार

दमोह में जन्मदिन की पार्टी को लेकर दो अधिवक्ता मित्रों के बीच शुरू हुआ दोस्ताना विवाद अब कानूनी नोटिस तक पहुंच गया है। अधिवक्ता विशाल सिंह राजपूत ने अपने मित्र गोविंद तिवारी को वरिष्ठ अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजकर पार्टी नहीं मिलने से हुई कथित मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षति के एवज में ₹41,250 की क्षतिपूर्ति मांगी है।

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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जन्मदिन की पार्टी देने का एक दोस्ताना वादा दो अधिवक्ता मित्रों के बीच ऐसा विवाद बन गया कि मामला कानूनी नोटिस तक पहुंच गया। दमोह जिला न्यायालय के अधिवक्ता गोविंद तिवारी को उनके मित्र विशाल सिंह राजपूत ने वरिष्ठ अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर पार्टी नहीं मिलने से हुई कथित मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षति के एवज में 41,250 रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है। नोटिस का खर्च अलग से देने को भी कहा गया है।

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मामला मंगलवार को सामने आने के बाद अधिवक्ता जगत में इसकी चर्चा शुरू हो गई। खास बात यह है कि पार्टी देने का वादा केवल बातचीत तक सीमित नहीं था, बल्कि दोनों पक्षों के मुताबिक अधिवक्ताओं की मौजूदगी में लिखित इकरारनामा भी तैयार किया गया था। अब एक पक्ष पार्टी देने का दावा कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष पार्टी नहीं मिलने की बात कहते हुए कानूनी नोटिस तक पहुंच गया है।a

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10 अगस्त को था जन्मदिन, पार्टी देने का किया गया था वादा

नोटिस भेजने वाले विशाल सिंह राजपूत के अनुसार, अधिवक्ता गोविंद तिवारी का जन्मदिन 10 अगस्त को था। इस मौके पर साथी अधिवक्ताओं और मित्रों ने उनसे जन्मदिन की पार्टी मांगी थी। विशाल का दावा है कि गोविंद ने पहले अगले रविवार पार्टी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय पर पार्टी नहीं हुई। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत हुई और 23 अगस्त को पार्टी देने का लिखित आश्वासन भी दिया गया। इसी आश्वासन के बाद पार्टी को लेकर मामला आगे बढ़ा।

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स्टाम्प पर तैयार हुआ इकरारनामा, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर का दावा

विशाल सिंह राजपूत के मुताबिक, पार्टी को लेकर एक लिखित इकरारनामा तैयार किया गया था। उनके अनुसार यह इकरारनामा स्टाम्प पर तैयार हुआ और उस पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर भी किए गए। इकरारनामे में 23 अगस्त की शाम पार्टी देने की बात कही गई थी। विशाल का दावा है कि इसी लिखित आश्वासन के आधार पर वह और उनके साथी पार्टी का इंतजार करते रहे।

शाम 7 से 9 बजे तक फोन करने का दावा, नहीं मिला जवाब

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 23 अगस्त की शाम करीब 7 बजे विशाल ने गोविंद तिवारी से संपर्क करने की कोशिश की। इसके बाद करीब 8 बजे भी फोन किया गया, लेकिन कथित तौर पर कोई जवाब नहीं मिला। विशाल के मुताबिक, रात करीब 9 बजे तक इंतजार करने के बावजूद पार्टी नहीं हुई। बाद में उन्हें बताया गया कि बांदकपुर रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में पार्टी दी गई थी और उसका बिल भी मौजूद है। हालांकि, विशाल का दावा है कि उन्हें इस पार्टी में आमंत्रित नहीं किया गया और न ही उन्होंने पार्टी का लाभ लिया।

रेस्टोरेंट के 1,750 और इलाज के 39,500 रुपये जोड़कर मांगी क्षतिपूर्ति

विशाल सिंह राजपूत का दावा है कि पार्टी नहीं मिलने के बाद उन्हें अपने स्तर पर रेस्टोरेंट में खाना खाना पड़ा, जिस पर 1,750 रुपये खर्च हुए। इसके बाद मानसिक परेशानी और तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए निजी अस्पताल में इलाज कराने की बात कही गई है। नोटिस के अनुसार, इलाज पर 39,500 रुपये खर्च हुए। इन दोनों खर्चों को जोड़कर कुल 41,250 रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है। नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि पूरे घटनाक्रम के कारण उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

सात दिन में पार्टी और 41,250 रुपये देने की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता कमल सिंह ठाकुर के माध्यम से भेजे गए कानूनी नोटिस में गोविंद तिवारी से नोटिस प्राप्त होने के सात दिन के भीतर पार्टी देने और 41,250 रुपये की क्षतिपूर्ति अदा करने की मांग की गई है। इसके अलावा नोटिस भेजने में हुए खर्च के रूप में 2,000 रुपये की अतिरिक्त राशि देने की मांग का भी उल्लेख है। मांग पूरी नहीं होने पर आगे कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।

गोविंद तिवारी बोले- पार्टी पहले ही दे चुका हूं

दूसरी ओर, अधिवक्ता गोविंद तिवारी ने पार्टी नहीं देने के आरोप से अलग दावा किया है। उनका कहना है कि उन्होंने जन्मदिन के अवसर पर दोस्तों के लिए पार्टी दी थी। उनके मुताबिक पार्टी रात में आयोजित की गई थी और उसके बिल भी उनके पास मौजूद हैं। गोविंद तिवारी की ओर से उनके सीनियर अधिवक्ता मनीष नगाइच ने कहा कि कानूनी नोटिस प्राप्त हुआ है और उसका जवाब भी कानूनी तरीके से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामला दो मित्रों के बीच का है और प्राथमिक प्रयास यही रहेगा कि आपसी बातचीत तथा मध्यस्थता के जरिए विवाद का समाधान निकाला जाए।

सीनियर अधिवक्ता बोले- कानूनी पहलुओं का अध्ययन होगा

सीनियर अधिवक्ता मनीष नगाइच के अनुसार, उनके जूनियर अधिवक्ता गोविंद तिवारी पर जन्मदिन की पार्टी देने का वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए नोटिस भेजा गया है। नोटिस में क्षतिपूर्ति की मांग की गई है और अब इसके कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता मामले को अदालत तक ले जाने के बजाय आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकालने की रहेगी।

विशाल बोले- पार्टी लेकर रहेंगे, पहले दोस्ताना समाधान की उम्मीद

नोटिस भेजने वाले विशाल सिंह राजपूत ने बताया कि वह कानून की पढ़ाई कर रहे हैं और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मार्गदर्शन में कानूनी बारीकियां सीख रहे हैं। उनका कहना है कि पूरा मामला मित्रों के बीच का है और उन्हें उम्मीद है कि बातचीत के जरिए इसका समाधान निकल सकता है। हालांकि, विशाल ने यह भी साफ किया कि अगर सात दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो आगे कानूनी कदम उठाने पर विचार किया जाएगा। उनका कहना है कि उनकी प्राथमिकता फिलहाल विवाद को मित्रवत तरीके से सुलझाने की है।

दोस्ती, जन्मदिन की पार्टी और कानूनी नोटिस... अब जवाब का इंतजार

जन्मदिन की पार्टी से शुरू हुआ यह दोस्ताना मामला अब कानूनी नोटिस तक पहुंच चुका है। एक पक्ष का दावा है कि पार्टी देने का वादा पूरा नहीं किया गया और इसके चलते उसे आर्थिक, शारीरिक और मानसिक नुकसान हुआ, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि जन्मदिन की पार्टी पहले ही दी जा चुकी है और उसके बिल भी मौजूद हैं।



फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम हैं। अब नजर इस बात पर है कि सात दिन के भीतर अधिवक्ता गोविंद तिवारी की ओर से कानूनी नोटिस का क्या जवाब दिया जाता है। मामला आपसी बातचीत और मध्यस्थता से सुलझता है या फिर जन्मदिन की पार्टी का यह अनोखा विवाद न्यायालय की चौखट तक पहुंचता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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