उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के पिलखनी औद्योगिक क्षेत्र में युवा उद्यमी ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इतना बड़ा नाम, कारोबार और रुतबा। फिर अंकुर ने क्यों उठाया यह कदम।उद्यमी के आत्महत्या के बाद हर कोई यही कह रहा था।
बड़ा नाम, कारोबार और रुतबा, फिर क्यों उठाया यह कदम, आईएएस के भाई की आत्महत्या पर उठे सवाल
जिला अस्पताल में परिवार से जुड़े और कुछ अन्य लोगों ने बताया कि कुछ समय से अंकुर परेशान तो लगे, मगर वे ऐसा कदम उठा लेंगे, इसका अंदाजा नहीं था। वहां मौजूद लोगों में आर्थिक स्थिति के कारण ऐसा करने और इससे पहले भी एक बार खुदकुशी का प्रयास करने की चर्चा रही।
यह भी चर्चा रही कि कुछ दिन पहले ही जीएसटी की एसआईबी ने इनकी फैक्टरी पर सर्वे किया था, जिसमें कई लाख रुपये का टैक्स लगाया गया था। वहीं, शव का पंचनामा भरवाने वालों में शामिल रहे विकास अग्रवाल ने इतना ही कहा कि अंकुर ने आत्महत्या की है। उन्हें किसी पर कोई शक नहीं है और न ही परिवार किसी तरह की कार्रवाई चाहता है।
बेटे के नाम पर है पिलखनी में फैक्टरी
उद्यमी अंकुर अग्रवाल की पिलखनी में फैक्टरी उनके बेटे प्रथम के नाम पर है। इसमें बैटरी से जुड़ा काम किया जाता है। ग्रीन पार्क कॉलोनी में उनके आवास पर कुछ पड़ोसियों ने बताया कि अंकुर अक्सर दिन में 11 से 12 बजे के आसपास यहां से निकलते थे। सोमवार को भी दोपहर में ही गए थे। इसके बाद वे तो नहीं लौटे उनका शव ही यहां पहुंचा। वे हैरान रहे कि यह सब कैसे हो गया।
सर...क्या आदेश है...क्या करना है
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव आईएएस लव अग्रवाल के छोटे भाई होने के कारण अंकुर अग्रवाल के शव के पोस्टमार्टम से लेकर अन्य कार्रवाई में स्थानीय अफसर लगातार फोन पर व्यस्त रहे। अफसरों से यही पूछते रहे - सर..क्या आदेश है...क्या करना है। बाद में शव का पोस्टमार्टम न कराने पर सहमति बनी।
ग्रीन पार्क में शव पहुंचते ही जुट गई भीड़
ग्रीन पार्क में जैसे ही अंकुर अग्रवाल का शव पहुंचा तो यहां पड़ोसियों से लेकर शहर के कई उद्यमियों तक की भीड़ जुट गई। आईएएस लव अग्रवाल भी देर रात तक यहां पहुंच गए। एसडीएम अनिल कुमार के अलावा थाना सदर, थाना सरसावा और कुतुबशेर की पुलिस टीमें मौजूद रहीं।