मुजफ्फरनगर जनपद में बुढ़ाना के डीएवी डिग्री पीजी कॉलेज में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब बीए द्वितीय वर्ष के छात्र उज्जवल राणा ने कॉलेज परिसर में ही खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली।
Muzaffarnagar: शिकायतों पर कार्रवाई न होने से टूटा हौसला, कॉलेज के छात्र ने कक्षा में लगाई आग, हालत गंभीर
बुढ़ाना के डीएवी डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष के छात्र ने कथित उत्पीड़न और शिकायतों पर कार्रवाई न होने से आहत होकर क्लासरूम में खुद को आग लगा ली। गंभीर हालत में उसे मेरठ रेफर किया गया। घटना के बाद छात्रों में आक्रोश है।
फीस विवाद को बताया तनाव की वजह
उज्जवल राणा पिछले कई दिनों से फीस संबंधित मुद्दे को लेकर कॉलेज प्रशासन पर दबाव और उपेक्षा के आरोप लगा रहा था। उसने यूनिवर्सिटी से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी थी, लेकिन उसके अनुसार कार्रवाई नहीं हुई।
शुक्रवार को उसने एसडीएम बुढ़ाना और सीओ को भी लिखित शिकायत दी थी। छात्र का आरोप है कि उसकी बात किसी स्तर पर सुनी नहीं गई, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गया।
वीडियो जारी कर लगाए थे गंभीर आरोप
आत्मदाह से एक दिन पहले उज्जवल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर प्राचार्य प्रदीप कुमार और कुछ शिक्षकों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
वीडियो में उसने कहा था कि पहले प्राचार्य ने उसकी पिटाई की और फिर पुलिस को बुलाकर उसे दबाने की कोशिश की। उसने दावा किया कि जब वह अपनी शिकायत एसडीएम कार्यालय में जमा करने जा रहा था, तो कॉलेज के एक शिक्षक ने वह पत्र छीनकर वापस प्राचार्य को दे दिया।
धरने पर बैठे छात्र, प्रशासन मौके पर
घटना के बाद कॉलेज परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में छात्र गेट के बाहर धरने पर बैठ गए और निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे। हंगामे की जानकारी पाकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और भीड़ को समझाने का प्रयास किया।
वहीं प्राचार्य प्रदीप कुमार ने छात्र द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फीस प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार होती है और किसी के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया गया।
जांच शुरू, छात्र की हालत गंभीर
पुलिस ने बताया कि उज्जवल राणा को गंभीर हालत में मेरठ रेफर किया गया है और उसके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मामले की जांच की जा रही है। कॉलेज प्रशासन ने भी एक आंतरिक जांच समिति बनाने की बात कही है।
यह घटना न सिर्फ शिक्षा संस्थानों में संवाद की कमी और दबाव की स्थिति को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि युवाओं को किस स्तर तक मानसिक रूप से अकेला महसूस कराया जा रहा है।