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Mulayam: व्यवहार से भी मुलायम थे नेताजी, कार्यकर्ताओं के दुख को करते थे साझा, अक्सर फोन कर पूछते थे खैरियत
Tue, 11 Oct 2022 11:34 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 11 Oct 2022 11:34 AM IST
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मुरादाबाद मंडल में मजबूत सियासी किला तैयार करने वाले मुलायम सिंह यादव का निजी व्यवहार मुलायम था। पिछड़ी जातियों को साधने के लिए दो बार संभल
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
शहर निवासी पूर्व विधायक सौलत अली के परिवार से मुलायम सिंह यादव का लंबे समय तक साथ रहा। सौलत अली के पिता रियासत हुसैन का भी जिले की सियासत में खासा दखल रहा है। वह 1962 और 1969 में प्रजा सोसलिस्ट पार्टी से मुरादाबाद देहात विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे थे।
दिवगंत मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
प्रजा सोसलिस्ट पार्टी के टूट जाने के बाद रियासत हुसैन ने खुद की भारतीय समाज पार्टी बनाई और अपनी पार्टी के टिकट पर विपरीत परिस्थिति के बीच भी 1977 और 1980 में मुरादाबाद देहात विधानसभा सीट से फतह हासिल की थी।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
सौलत अली बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव उनके पिता के संपर्क में 1967 में आए थे। सोसलिस्ट पार्टी की सरकार में तब वह सहकारिता मंत्री थे। रियासत हुसैन के आग्रह पर वह दलपतपुर स्थित दुग्ध उत्पादन समिति केंद्र (पराग फैक्टरी) का उद्घाटन आकर किया था। रियासत हुसैन को वह अपने बड़े भाई के तौर पर मानते थे।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
रियासत हुसैन के गांव सकटू नगला भी मुलायम सिंह तब गए थे। ऐसा नहीं कि मुलायम सिंह यादव का यह पारिवारिक रिश्ता रियासत हुसैन के सियासत में रहने तक ही रहा, बल्कि रियासत हुसैन के निधन के बाद भी उनके परिवार से बना रहा। वैसे तो मुलायम सिंह यादव मुरादाबाद जिले की सरजमीं पर सियासत को लेकर कई बार आए, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार उनका आगमन 16 जून 1990 को गोविंदपुर खुर्द स्थित रियासत हुसैन की बरसी के मौके पर रियासत हुसैन मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में हुआ था।