एक तरफ पूरा देश प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है वहीं, शहर में धड़ल्ले से पेड़ काटे जा रहे हैं। सोमवार को गढ़ रोड पर मोती प्रयाग कालोनी के पास बाग में आम के 80 पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया तो लोग आक्रोशित हो गए। डीएम से शिकायत करने के बाद लोगों ने डीएफओ से मुलाकात की।
मेरठः देश में प्रदूषण की मार के बीच रातों-रात काटे गए 80 हरे-भरे पेड़, मचा हड़कंप
मोतीप्रयाग कालोनी के पास पुराना आम का बाग है। इसके चारों तरफ कालोनी में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। लोगों ने देखा कि यहां पर पेड़ों को काटकर ट्रक में डाला जा रहा है। इसकी शिकायत लोगों ने डीएम से की तो उन्होंने इस संबंध में डीएफओ से कार्रवाई को कहा।
लोगों ने डीएफओ से कहा कि गलत तथ्य बताकर पेड़ों को काटा जा रहा है। एक तरफ सरकार पेड़ लगाने का प्रयास कर रही है और अधिकारी अवैध रूप से भ्रष्टाचार के कारण हरे भरे पेड़ों को कटवा रहे हैं। डीएफओ ने इस प्रकरण में पेड़ों को काटने की अनुमति देने वाले डीएचओ से नाराजगी व्यक्त करते हुए तुरंत कटान का काम बंद कराते हुए माल जब्ती के आदेश जारी कर दिए।
डीएफओ ने बताया कि वन विभाग कार्यालय में 17 अक्तूबर को हार्टीकल्चर विभाग की तरफ से एनओसी आई थी। इसमें इन वृक्षों के बारे में लिखा है कि इनकी फलदायी क्षमता खत्म हो चुकी है। ये रोगग्रस्त हैं। इसके बाद ही वन विभाग की तरफ से अनुमति दी गई।
लोगों ने आरोप लगाया कि हार्टीकल्चर विभाग की तरफ से गलत रिपोर्ट जारी कराई गई है। ऐसे में वन विभाग के अफसरों को मौके पर जाकर कटान की अनुमति देने से पहले खुद निरीक्षण करना चाहिए था। डीएफओ ने इस मामले में वन विभाग, हार्टीकल्चर और स्थानीय लोगों की संयुक्त कमेटी का गठन कर दिया है। पेड़ों की टेक्निकल रिपोर्ट और कमेटी के सदस्यों के मत लिए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लोगों ने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती है। डीएफओ का घेराव करने वालों में एडवोकेट रामकुमार शर्मा, अजय गर्ग, विनीत कुमार गर्ग, डॉ. समीर, गुंजन शर्मा, विवेक राज, डॉक्टर शिशिर जैन, विरेंद्र यादव और डीएस गौतम आदि मौजूद रहे।
संयुक्त कमेटी करेगी जांच
हार्टीकल्चर विभाग ने 17 अक्तूबर को दी एनओसी में कहा कि इन पेड़ों की फलदायी क्षमता खत्म हो चुकी है। ये रोगग्रस्त हैं। इसी आधार पर काटे जाने की अनुमति दी गई। लोगों की शिकायत पर कटान का काम बंद कराते हुए माल जब्ती के आदेश दिए गए हैं। वन विभाग, हार्टीकल्चर और स्थानीय लोगों की संयुक्त कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -अदिति शर्मा, डीएफओ