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मेरठः देश में प्रदूषण की मार के बीच रातों-रात काटे गए 80 हरे-भरे पेड़, मचा हड़कंप

Tue, 19 Nov 2019 12:58 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 19 Nov 2019 12:58 PM IST
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pollution level Increasing in country but more than fifty of green trees cut down in Meerut city
काटे गए पेड़ - फोटो : अमर उजाला

एक तरफ पूरा देश प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है वहीं, शहर में धड़ल्ले से पेड़ काटे जा रहे हैं। सोमवार को गढ़ रोड पर मोती प्रयाग कालोनी के पास बाग में आम के 80 पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया तो लोग आक्रोशित हो गए। डीएम से शिकायत करने के बाद लोगों ने डीएफओ से मुलाकात की।



पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री पोर्टल पर प्रशासन की मिलीभगत से हरे पेड़ काटने की शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं, डीएफओ ने इस मामले में वन विभाग, हॉर्टीकल्चर और स्थानीय लोगोें की कमेटी बनाई है। कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। आगे देखें कि जो फलदार पेड़ लंबे समय तक स्वस्थ वातावरण और छांव देते रहे। आखिर कैसे चंद घंटों में खत्म कर दी गई उन पेड़ों की जिंदगी: -

pollution level Increasing in country but more than fifty of green trees cut down in Meerut city
काटे गए पेड़ - फोटो : अमर उजाला

मोतीप्रयाग कालोनी के पास पुराना आम का बाग है। इसके चारों तरफ कालोनी में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। लोगों ने देखा कि यहां पर पेड़ों को काटकर ट्रक में डाला जा रहा है। इसकी शिकायत लोगों ने डीएम से की तो उन्होंने इस संबंध में डीएफओ से कार्रवाई को कहा।

लोगों ने डीएफओ से कहा कि गलत तथ्य बताकर पेड़ों को काटा जा रहा है। एक तरफ सरकार पेड़ लगाने का प्रयास कर रही है और अधिकारी अवैध रूप से भ्रष्टाचार के कारण हरे भरे पेड़ों को कटवा रहे हैं। डीएफओ ने इस प्रकरण में पेड़ों को काटने की अनुमति देने वाले डीएचओ से नाराजगी व्यक्त करते हुए तुरंत कटान का काम बंद कराते हुए माल जब्ती के आदेश जारी कर दिए।

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पेड़ - फोटो : अमर उजाला

डीएफओ ने बताया कि वन विभाग कार्यालय में 17 अक्तूबर को हार्टीकल्चर विभाग की तरफ से एनओसी आई थी। इसमें इन वृक्षों के बारे में लिखा है कि इनकी फलदायी क्षमता खत्म हो चुकी है। ये रोगग्रस्त हैं। इसके बाद ही वन विभाग की तरफ से अनुमति दी गई।


 
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ट्रक में भरी काटे गए पेड़ों की लकड़ी - फोटो : अमर उजाला

लोगों ने आरोप लगाया कि हार्टीकल्चर विभाग की तरफ से गलत रिपोर्ट जारी कराई गई है। ऐसे में वन विभाग के अफसरों को मौके पर जाकर कटान की अनुमति देने से पहले खुद निरीक्षण करना चाहिए था। डीएफओ ने इस मामले में वन विभाग, हार्टीकल्चर और स्थानीय लोगों की संयुक्त कमेटी का गठन कर दिया है। पेड़ों की टेक्निकल रिपोर्ट और कमेटी के सदस्यों के मत लिए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लोगों ने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती है। डीएफओ का घेराव करने वालों में एडवोकेट रामकुमार शर्मा, अजय गर्ग, विनीत कुमार गर्ग, डॉ. समीर, गुंजन शर्मा, विवेक राज, डॉक्टर शिशिर जैन, विरेंद्र यादव और डीएस गौतम आदि मौजूद रहे। 

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काटे गए पेड़ - फोटो : अमर उजाला

संयुक्त कमेटी करेगी जांच
हार्टीकल्चर विभाग ने 17 अक्तूबर को दी एनओसी में कहा कि इन पेड़ों की फलदायी क्षमता खत्म हो चुकी है। ये रोगग्रस्त हैं। इसी आधार पर काटे जाने की अनुमति दी गई। लोगों की शिकायत पर कटान का काम बंद कराते हुए माल जब्ती के आदेश दिए गए हैं। वन विभाग, हार्टीकल्चर और स्थानीय लोगों की संयुक्त कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -अदिति शर्मा, डीएफओ 

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