दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर वाहन फर्राटा भरने लगे हैं। एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे पर भले ही 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाने की अनुमति दी है लेकिन चालक वाहनों को इससे भी तेज दौड़ा रहे हैं। ये गति चालकों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। दो दिन से एक्सप्रेसवे के काशी टोल प्लाजा पर 24 घंटे में 50 हजार वाहनों की आवाजाही रिकॉर्ड की गई है। रविवार आज अवकाश के कारण वाहनों की संख्या और बढ़ जाएगी।
तस्वीरें: बाबू जी धीरे चलना... दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर है बड़ा खतरा, सामने आई ये बात
दरअसल, परतापुर के बाद मोदीनगर और मुरादनगर गंगनहर क्षेत्र तक खेती और जंगल का इलाका है। नीलगायों का झुंड खेतों में घूमता रहता है। कई बार ये झुंड एक्सप्रेसवे पर भी आ जाता है, क्योंकि यहां पर एक्सप्रेसवे की ऊंचाई कम है। यही नहीं, कई जगह आरईवाल भी पूरी नहीं बनी हैं। क्षेत्र में एनएचएआई की ओर से चार से पांच फीट ऊंची दीवार बनाई जा रही है, जो अभी पूरी नहीं हुई है। इसके चलते नीलगायें कभी खेत तो कभी एक्सप्रेसवे पर नजर आती हैं। कई वाहन चालक अधिकारियों को खतरे के प्रति आगाह कर चुके हैं।
क्या करना चाहिए
- एनएचएआई को मेरठ से दिल्ली जाने वाले वाहन चालकों के लिए परतापुर इंटरचेंज के बाद चेतावनी के संकेतक लगाने होंगे
- नीलगाय वाले क्षेत्र में निर्माण करने वाली कंपनी को तारबंदी करनी होगी, जिससे वे एक्सप्रेसवे की लेन को पार न कर सकें
- दीवार और फेसिंग का काम पूरा न होने तक चालकों को बताना होगा कि वे निर्धारित गति सीमा पार करने पर जान जोखिम में डालेंगे
समस्या का समाधान करेंगे
वाहन चालकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। आशंका वाले क्षेत्र में चार से पांच फीट की दीवार बनाई जा रही है। इसके बाद भी कोई दिक्कत होगी तो उसी के हिसाब से सुधार करा लिया जाएगा। - मुदित गर्ग, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
परतापुर इंटरचेंज पर गलत दिशा में वाहन आने का सिलसिला जारी है। इसके लिए प्रबंध करने से पहले ही ट्रैफिक पुलिस भी हटा ली गई है। अगर ट्रैफिक पुलिस तैनात कर दी जाए तो गलत दिशा में जाने वाले वाहन रोके जा सकते हैं।