मेरठ के शास्त्रीनगर की सेंट्रल मार्केट में जब आवास विकास परिषद की टीम दुकानों को सील करने पहुंची तो वहां का मंजर किसी त्रासदी से कम नहीं था। 40 साल पुराने सुंदर सपनों को टूटता देख व्यापारियों में गहरा रोष और दुख व्याप्त था।
दशकों की मेहनत को चंद मिनटों में सरकारी ताले के पीछे कैद होते देख व्यापारियों के सब्र का बांध टूट गया। सबसे हृदयविदारक स्थिति साहिल प्लाजा में देखने को मिली जहां शर्मा कलेक्शन की मालकिन साधना शर्मा अपनी दुकान बचाने के लिए अफसरों के आगे गिड़गिड़ाती रहीं।
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.सेंट्रल मार्केट में सीलिंग प्रक्रिया के दौरान रोती-बिलखती महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दुकान को सील होता देख साधना शर्मा फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने रुंधे गले से अधिकारियों से गुहार लगाई। आप मेरे बेटे जैसे हो... यह मेरे पूरे जीवन की कमाई है। इसे उजड़ते कैसे देख लूं? मैं मर जाऊंगी, लेकिन दुकान पर सील नहीं लगने दूंगी।
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.सेंट्रल मार्केट में सीलिंग प्रक्रिया के दौरान रोती-बिलखती महिला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महिला की इन बातों ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया लेकिन कानून की औपचारिकताएं भावनाओं पर भारी पड़ीं। आवास विकास परिषद के अधिकारियों और पुलिस बल ने साफ कहा कि वे कानून से बंधे हैं और सीलिंग की कार्रवाई को रोका नहीं जा सकता।
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.सेंट्रल मार्केट में सीलिंग प्रक्रिया के दौरान रोती-बिलखती महिला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जमीन पर बैठ निहारती रहीं अपनी दुकान
काफी जद्दोजहद के बाद साधना शर्मा पीछे हटी लेकिन उनका दर्द कम नहीं हुआ। वह के काफी देर तक दुकान के बाहर जमीन पर ही बैठकर अपनी दुकान को निहारती रहीं।
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.सेंट्रल मार्केट में सीलिंग प्रक्रिया के दौरान रोती-बिलखती महिला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
व्यापारी बेहोश हुआ तो मचा हड़कंप
बुधवार दोपहर 12:11 बजे जब आवास विकास परिषद की टीमें एक-एक कर दुकानों पर ताले जड़ रही थीं तभी गिरधर क्लॉथ हाउस के मालिक अशोक गिरधर अपने परिवार के साथ वहां पहुंचे। अपनी जीवनभर की पूंजी पर सील लगती देख वह सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके और अचानक बेहोश होकर गिर पड़े।