पापा को कहां भेज रहे हो, मुझे उनके साथ खेलना है। यह सवाल शहीद के चार साल के बेटे दीपांशु ने अपने चाचा से किया तो हर तरफ सन्नाटा पसर गया। आगे देखें तस्वीरें...
शहीद के चार साल के बेटे ने मुखाग्नि देते वक्त पूछा ऐसा सवाल, पसर गया हर तरफ सन्नाटा
शहीद सतेंद्र का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव में पहुंचा तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। घर से करीब एक किमी दूर श्मशान घाट तक शहीद की अंतिम यात्रा पहुंची। शहीद के चार वर्षीय बेटे दीपांशु ने चाचा केशव के साथ चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान दीपांशु ने अपने चाचा से कई बार पूछा कि पापा को कहां भेज रहे हो।
पापा ने कहा था कि वह आकर उनके साथ रहेंगे। मुझे उनके साथ खेलना है। मासूम के सवाल को सुनकर सन्नाटा पसर गया। वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। ग्रामीण बोले कि मासूम को क्या पता कि अब उसके पापा कभी लौटकर नहीं आएंगे।
बच्चों को पढ़ाकर अफसर बनाने की तमन्ना रह गई अधूरी
शहीद सतेंद्र की पत्नी सोनिया ने रोते हुए बताया कि उनकी 11 जून को आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने 19 जून को घर आने की बात कही थी। सोनिया के मुताबिक वे जब भी घर आते थे या फोन पर बात करते थे तो वे बच्चों की पढ़ाई और भाइयों की नौकरी के लिए चिंतित रहते थे। वे कहते थे कि हमने अपने दिन कैसे भी गुजारे हो, लेकिन बच्चों को वे पढ़ा लिखाकर उच्च शिक्षा दिलाकर अधिकारी बनाने का काम करेंगे, लेकिन अब उनके जाने के बाद हमें कुछ नहीं सूझ रहा है। चारों तरफ अंधेरा नजर आ रहा है। किसे पता था कि वो फिर घर पर कभी वापस नहीं आएंगे।
शहीद की पत्नी ने कहा कि उनके पति का बलिदान खाली ना जाए। सरकार से बस एक ही मांग है कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की रणनीति बनाई जाए।
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