गणेश चतुर्थी के लिए मेरठ में मंदिरों को सजाया गया है। मंदिर, घर और मुख्य चौराहों पर पंडाल लगाने की तैयारी है। सोमवार को पश्चिमी यूपी के मेरठ समेत सभी जिलों में बप्पा के लिए जरकन, जड़ाऊ में बने आभूषणों की खरीदारी की गई। सदर, बुढ़ाना गेट, शास्त्रीनगर, शारदा रोड पर स्थित दुकानों पर देर रात तक भीड़ लगी रही।
गणेश चतुर्थी: आज घर-घर विराजेंगे गजानन, लगेगा लड्डुओं का भोग, होगी पूजा-अर्चना, देखें शुभ मुहूर्त
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ये सात दिन शुभ कार्यों के लिए रहेंगे उत्तम
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्टोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि इस वर्ष तो गणेश चतुर्थी कई मायनों में खास है। अकेले चतुर्थी ही शुभ नहीं है, बल्कि 19 सितंबर से 28 सितंबर के बीच 7 दिन अच्छे योग बन रहे हैं।
ऋषि पंचमी, सूर्य षष्ठी, महालक्ष्मी व्रत, राधाष्टमी, चंद्र नवमी, पद्मा एकादशी, प्रदोष इन सात दिनों में आप सिर्फ गणपति की पूजा के अलावा कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। वाहन और घर खरीदने के लिए भी यह समय शुभ है।
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश जी के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे भारत में बड़ी ही श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश पूरे देश में गणेश चतुर्थी आस्था के साथ मनाई जाती है। घरों में गणेश जी को स्थापित किया जाता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की धूमधाम से विसर्जन कर विदाई दी जाती है।
बुद्धि, विवेक, धन-धान्य के कारक हैं गणेश भगवान
गणेश चतुर्थी का पर्व दो से दस दिन तक मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस दिन मंगलवार का दिन है। भगवान गणेश जी को बुद्धि, विवेक, धन-धान्य, रिद्धि-सिद्धि का कारक माना जाता है। मान्यता है कि गणेश जी को प्रसन्न करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति की स्थापना होती है।
बाजार में विभिन्न प्रकार की छोटी-बड़ी गणेश जी की मूर्तियां हैं, लेकिन प्रभु की इको-फ्रेंडली मूर्तियों को ग्राहक अधिक पसंद कर रहे हैं। मूर्तियां बनाने वाले कारीगर राज ने बताया कि भगवान गणेश की यह मूर्तियां कच्ची मिट्टी से बनाई जाती हैं।
ये मूर्तियां विसर्जित होने कर पानी में आराम से घुल जाती हैं। सबसे छोटी मूर्तियां 200 और बड़ी मूर्तियां 11000 रुपये तक की बाजार में उपलब्ध हैं। एक इको फ्रेंडली मूर्ति बनाने में 2 दिन का समय लगता है। पीओपी की मूर्ति एक दिन में तैयार हो जाती हैं।