खाकी और खादी की सरपरस्ती में अकबर बंजारे का गोस्तकरी का धंधा दूसरे राज्यों में फलता-फूलता रहा। असम की पुलिस उसको ढूंढती रही और मेरठ पुलिस बचाती रही। करीब दो साल से यह खेल चल रहा था। मामले की जानकारी लगने पर एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने फलावदा पुलिस को लगाया और घेराबंदी कराकर अकबर बंजारा व उसके दो भाई सलमान, शमीम को गिरफ्तार कराया। गिरफ्तारी के दौरान बंजारे ने खाकी-खादी के खेल की यह बात मेरठ पुलिस को बताई।
मुठभेड़: खाकी-खादी के संरक्षण में चलते रहे अकबर के काले कारनामे, असम पुलिस से हर बार बच जाता था बंजारा
असम पुलिस से बच जाता था बंजारा
असम पुलिस जब-जब मेरठ आती थी, इसकी जानकारी बंजारे के पास पहले ही पहुंच जाती थी। असम पुलिस ने कई बार उसकी घेराबंदी के लिये स्थानीय लोगों की मदद से जाल फैैलाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। असम पुलिस उसको गिरफ्तार कर सकती है, इसको देखते हुए बंजारे ने मेरठ शहर में शास्त्रीनगर और लिसाड़ीगेट में मकान बना लिए। इन मकानों में वह एक-दो दिन रुकता था और फिर फलावदा चला जाता।
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बेकसूर थे बेटे, रसूखदारों ने भेद खुलने के डर से मरवा दिए : पीरू बंजारा
फलावदा। उग्रवादियों के हमले में मारे गए गोतस्कर अकबर बंजारे के पिता हाजी पीरू ने अपने दोनों बेटों को बेगुनाह बताते हुए इसे साजिश बताया है। उसने आरोप लगाया है कि तस्करी के कारोबार से जुड़े रसूखदारों ने कोर्ट में भेद खुलने के भय से उसके बेटों को पेशी से पहले मरवा दिया।
हाजी पीरू बंजारे ने मीडिया को बताया कि पहले असम में वह पशुओं का व्यापार करता था। करीब पांच वर्ष पूर्व कारोबार उसके बेटों ने संभाल लिया था। असम में कुछ लोगों ने गोवंश पकड़े जाने पर उसके बेटों का नाम लिया था। असम में दो मुकदमों के अलावा उसके बेटों पर कोई अपराधिक मुकदमें दर्ज नहीं थे। पीरू ने पिछले दिनों पुलिस द्वारा फलावदा में पकड़े गए ट्रक में दर्ज किया गया गोकशी का मामला भी उसके बेटों पर लगाया गया था। एक मामले में फैसले के बावजूद पड़ोसी की तहरीर पर फलावदा पुलिस ने रंगदारी का मुकदमा दर्ज कर लिया। पीरू ने कहा कि अकबर के पास एक मकान व एक मार्केट है, जो लोन लेकर बनाई गई थी।
बेटों के शव लेने परिजन असम रवाना
अकबर के पिता पीरू बंजारे ने बताया कि दोनों बेटों के शव लेने के लिए परिवार के चार लोग असम भेज दिए गए हैं, हालांकि अभी वहां पर उनका पोस्टमार्टम नहीं हुआ है।
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