मेरठ शहर ने बहुत कुछ झेला पर ऐसा सन्नाटा कभी नहीं देखा। लोग अपने और परिवार के लिए इसे अच्छा बता रहे हैं। वे बोले, जो जीवन को बचाए...ऐसा कर्फ्यू अच्छा है।
2 of 5
जनता कर्फ्यू
- फोटो : अमर उजाला
छपरौली से पांच बार विधायक रहे 88 वर्षीय नरेंद्र सिंह बताते हैं कि 1977 में इमरजेंसी लगी तो उस दिन भी सन्नाटा था। लोग डरे हुए थे। इसके बाद मेरठ में कई बार कर्फ्यू लगा पर एक साथ पूरा बंद कभी नहीं रहा। यदि जीवन बचाने के लिए ऐसा करना पड़ता है तो अच्छा है। लोग जागरूक नहीं हुए तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।
3 of 5
तनजा कर्फ्यू
- फोटो : अमर उजाला
रिटायर्ड सीओ 77 वर्षीय राजेंद्र सिंह बताते हैं कि नौकरी के दौरान कई बार कर्फ्यू देखे परंतु आज का सन्नाटा बिल्कुल अलग था। इसे ही भले जनता कर्फ्यू का नाम दिया हो परंतु ये जान बचाने वाला है। जीवन बचाने के लिए ऐसे कर्फ्यू का सभी को सहयोग करना हम सभी का कर्तव्य है।
4 of 5
ताली बजाती मुस्लिम महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ कॉलेज के पूर्व प्राचार्य 75 वर्षीय डॉ. एसके अग्रवाल कहते हैं कि ऐसा बंद कभी नहीं देखा। सबको जीवित रखना है तो ऐसा करना बेहद जरूरी है। यदि कर्फ्यू की तरह लोग जागरूकता नहीं दिखाएंगे तो वे अपने साथ परिजनों को भी संकट में डाल देंगे। कोरोना संक्रमण तबाह कर देगा। ऐसा कर्फ्यू अच्छा है।
5 of 5
थाली बजाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
75 वर्षीय किसान शौबीर सिंह कहते हैं कि इतना सन्नाटा आज तक नहीं देखा। सभी को जनता कर्फ्यू का महत्व समझना होगा और सरकार का सहयोग करना चाहिए। ये सब उन्हीं के लिए हो है। यदि हम लोग इसका पालन नहीं करेंगे तो कोरोना वायरस संक्रमण पूरे देश को अपनी जद में ले लेगा।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/