वक्त का तकाजा कहें या लाॅकडाउन की मजबूरी कि ऐसे मुश्किल वक्त में लोगों की मदद के लिए पुलिस आगे आई है। मेरठ में शहर से लेकर देहात के थानों तक में महिला पुलिसकर्मी गरीब और असहायों के लिए खाना बना रही हैं।
मेरठ पुलिस के जज्बे को हर कोई कर रहा सलाम, गरीब और असहायों के लिए खाना पकाने से लेकर मास्क बनाने में जुटीं महिला कांस्टेबल
पुलिस यूं तो डंडा चलाने के लिए जानी जाती है, लेकिन देश जब कोरोना वायरस जैसी महामारी से गुजर रहा है। ऐसे में पुलिस का एक अलग ही रूप सामने आ रहा है। 24 घंटे अलर्ट रहकर सेवा करने वाली पुलिस इस समय किसी दबाव में श्रमदान नहीं कर रही, बल्कि वह अपनी मर्जी से लोगों की सहायता के लिए आगे आ रही है।
मेरठ के पुलिस लाइन में इसकी बानगी देखने को मिल रही है। जहां महिला और पुरुष पुलिसकर्मी दोनों ही गरीबों की मदद को खाना बनाने, बांटने से लेकर मास्क बनाने तक का काम कर रहे हैं। थाना प्रभारी अलग-अलग क्षेत्रों में खाने के निशुल्क पैकेट बंटवा रहे हैं। वहीं थाने और पुलिस लाइन में सुबह से शाम तक महिला कांस्टेबल रोटी बेल रही हैं।
नौचंदी थाने में तैनात कांस्टेबल मीनू बताती हैं कि वह पिछले पांच दिन से थाने में सब्जी काटने से लेकर रोटी बनाने के काम में हाथ बंटा रही हैं। अधिकारियों के दबाव में पुलिसकर्मी यह काम नहीं कर रहे, बल्कि कोई भी गरीब व असहाय व्यक्ति सड़क पर भूख-प्यास से परेशान न हो, इस सेवा भाव से सभी यह काम कर रहे है।
पुलिस लाइन में इन दिनों 20 से अधिक महिला कांस्टेबल रोटियां बेल रहीं हैं। जिनमे बीना, गीता, मनीषा, सरिता और अन्य कांस्टेबल शामिल हैं। खाना बनाने के लिए अलग से फॉलोअर भी लगाए गए हैं। लेकिन कांस्टेबल सुबह से शाम तक खाना बना रही हैं।
मनीषा और सरिता का कहना है की समाज की सेवा के लिए ही वर्दी पहनी है। ऐसे माहौल में जब गरीबों को समय से खाना नहीं मिल रहा है। उनकी सेवा करने का यह मौका उन्हें मिला है, जिसमें वह हरसंभव सहयोग कर रहीं हैं।
ऑफिसों से भी आगे आईं कांस्टेबल
एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह का कहना है कि पुलिस लाइन, परिवार परामर्श केंद्र, महिला थाना, पुलिस ऑफिस, एसपी सिटी ऑफिस और अन्य शाखा में जो भी महिला कांस्टेबल हैं वह खुद आकर श्रमदान कर रही हैं। अलग-अलग थानों और पुलिस लाइन में 50 से अधिक महिला कांस्टेबल हैं, जो श्रमदान कर रही हैं।